इस बरसात में आज भी याद है वह ‘बारिश’

0
33
अपने संक्षिप्त संबोधन में रामनाथ कोविंद ने पहली बार देश को अपने विचारों से अवगत कराया। इस चुनाव में अपना पलड़ा कमजोर जानने के बाद भी  विपक्ष को एकजुट करते हुए कांग्रेस ने इसे विचारधारा की लड़ाई बताते हुए बीजेपी पर वार करने की कोशिश की। लेकिन इसका जवाब कोविंद ने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद दिया। उन्होंने जो कहा, उनका राजनीतिक विमर्श व चिंतन अंत्योदय से शुरू होता है और गरीब, शोषित तक जाता है।

नई दिल्ली/रिपोर्ट4इंडिया।

बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति के लिए चयनित हो गए हैं। मतगणना के बाद उनकी जीत की घोषणा हुई। इस मौके पर कोविंद ने संक्षिप्त संबोधन में 2017 के बरसात के मौसम को ऐसे महसूस किया जैसे वे अपने बचपन के काल में बारिश के दिनों में मिट्टी की दीवार और फूस की छत वाली घर में बारिश से भीगने से बचने के लिए एक जद्दोजहद रहती थी। जीवन की वही जद्दोजहद आज भी उनके मन में, दिलो-दिमाग में मौजूद है और भारत के राष्ट्रपति चयनित होने के बाद भी भूले नहीं।
उन्होंने कहा, आज भी हजारों कोविंद बारिश में भीग रहे होंगे, लाखों गरीब खेतों में, करोड़ो मेहनतकश भीग रहे होंगे, मेहनत व ईमानदारी के बल पर दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए। साफतौर पर, रामनाथ कोविंद ने संकेत दिया है कि रायसीना हिल तक वे पहुंच जरूर गए हैं लेकिन उनके हृदय में गरीब, वंचित, शोषित के लिए तड़पने वाला मन आज भी उद्वेलित है, उदिग्न है। उनका रास्ता साफ है, इस ऊंचाई पर भी जो उनसे बन पड़ेगा वह करेंगे।
अपने संक्षिप्त संबोधन में रामनाथ कोविंद ने पहली बार देश को अपने विचारों से अवगत कराया। इस चुनाव में अपना पलड़ा कमजोर जानने के बाद भी  विपक्ष को एकजुट करते हुए कांग्रेस ने इसे विचारधारा की लड़ाई बताते हुए बीजेपी पर वार करने की कोशिश की। लेकिन इसका जवाब कोविंद ने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद दिया। उन्होंने जो कहा, उनका राजनीतिक विमर्श व चिंतन अंत्योदय से शुरू होता है और गरीब, शोषित तक जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here