क्राइम पर या काम पर रोकथाम!

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नाइट शिफ्ट में महिलाओं का काम (फाइल)नाइट शिफ्ट में काम नहीं करेंगी उप्र में महिलाएं

लखनऊ। राज्य में बढ़ते अपराध को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने खासकर महिला सुरक्षा को लेकर एक फरमान जारी किया है। सरकार के अनुसार अब उप्र में किसी भी कारखाने में नाइट शिफ्ट में महिलाओं से काम नहीं कराया जाएगा। यदि किसी ने ऐसा किया तो प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी महिला श्रमिक को रात्रि 10 बजे से तड़के पांच बजे तक कारखानों में काम करने की अनुमति न दी जाए। जाहिर है, इस तरह की फरमानों के कारण महिला कर्मचारियों को कइ तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी। चुकि कंपनियों में बड़ी संख्या में अस्थायी और नियुक्ति नियमों के बिना बड़ी संख्या में महिलाओं से काम कराया जाता है। सख्ती होने पर कंपनी प्रबंधन सबसे पहले ऐसे महिला कर्मचारियों को ही काम से निकालने का प्रयास करेगा। यह भी विडंबना है कि श्रम विभाग के अधिकारी कंपनी प्रबंधन के खिलाफ न तो कार्रवाई करते हैं और न ही समय पर जांच-पड़ताल।

प्रमुख सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि किसी महिला कर्मचारी से रात्रि 10 बजे से सुबह पांच बजे तक कारखाने में कार्य करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी या इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी महिला कर्मचारी से किसी भी दिन नौ घंटे से अधिक और किसी सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला कर्मचारी को शाम सात बजे से रात्रि 10 बजे के मध्य या प्रात: पांच बजे से छह बजे के मध्य किसी समय कार्य करने के लिए बुलाया जाए तो कारखाने का अधिष्ठाता उसे उसके निवास स्थान से कारखाने तक जाने और वापस ले जाने के लिए कारखाने के व्यय पर आवश्यक प्रबन्ध करेगा।

उन्होंने बताया कि अगर कोई महिला कर्मचारी प्रात: पांच बजे और छह बजे के मध्य या शाम साम बजे और रात्रि 10 बजे के मध्य कारखाने में कार्य करने से इनकार करें तो केवल इसी आधार पर नियोजन से नहीं हटाया जाएगा। ऐसे समस्त कर्मचारियों को मध्यान्ह भोजन-रात्रि भोजन के लिए कैन्टीन सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने बताया कि किसी महिला कर्मचारी को प्रात: पांच बजे और छह बजे के मध्य या शाम सात बजे और रात्रि 10 बजे के मध्य कार्य करने के लिए बुलाने से पूर्व अधिष्ठाता अपने द्वारा प्रस्तावित व्यवस्था के सत्यापन के लिए कारखाने के सम्बन्धित निरीक्षक को सूचित करेगा और ऐसे सत्यापन के लिए निरीक्षक को न्यूनतम सात दिन का समय देगा। उन्होंने कहा कि किसी महिला कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना कार्य करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

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