चाबहार पर भारत-ईरान समझौते को लेकर अमेरिकी सांसदों उठाए सवाल

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Chahbahar-Portनई दिल्ली। अमेरिकी सीनेट के सदस्यों ने व्यापार संपर्क के उद्देश्य से भारत की मदद से दक्षिणी ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास पर सवाल खड़ा किया है। साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या इससे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के उल्लंघन का खतरा है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने सीनेट के सदस्यों की इस आपत्ति पर कहा कि ओबामा प्रशासन ईरान की इस परियोजना की बारीकी से जांच करेगा।

दक्षिण तथा मध्य एशिया मामलों की विदेश उप मंत्री निशा देसाई विश्वाल ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों की जानकारी देता रहा है। उन्होंने सीनेट की विदेशी मामलों की समिति की बैठक में कहा, हमें चाबहार परियोजना के निर्माण पर विस्तार के साथ विचार करना होगा।

भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के निर्माण के समझौते पर ईरान तथा अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के साथ हस्ताक्षर किया था और परियोजना के लिए 50 करोड़ डॉलर की रकम देने की घोषणा की थी। इससे भारत के लिए ईरान, अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया के साथ व्यापार का रास्ता खुलेगा। पाकिस्तान ने भारत के लिये इस रास्ते को बंद कर रखा था।

विश्व के छह प्रमुख देशों को ईरान के साथ परमाणु समझौते के बाद यूरोप तथा अमेरिका ने तेहरान के विरूद्ध लगे प्रतिबंधों को जनवरी से उठा लिया था लेकिन कुछ प्रतिबंध जारी हैं, जो मानवाधिकार तथा आतंकवाद से जुड़े हैं।

विश्वाल ने कहा कि हम समझते हैं कि ईरान के साथ भारत के संबंध मुख्यत: आर्थिक तथा ऊर्जा संबंधी मसले को लेकर है। अमेरिकी प्रशासन भारत की जरूरतों का एहसास करता है। भारत की दृष्टि से यह बंदरगाह अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया के लिए उसका प्रवेश द्वार है । विश्वाल ने कहा कि ईरान के साथ भारत का सैनिक सहयोग जैसा कोई संबंध नहीं है, जिससे अमेरिका के लिए खतरा पैदा हो।

मोदी अगले महीने अमेरिका आ रहे हैं और यहां वह कांग्रेस को संबोधित करेंगे। सिनेटर बेन कार्डिन ने पूछा कि विश्वाल को इस यात्रा में सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर की आशा है। विश्वाल ने कहा कि भारत तथा अमेरिका के बीच कई क्षेत्रों में पहले से ही मजबूत सुरक्षा सहयोग है। अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को काफी महत्वपूर्ण मानता है।

 

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