देशद्रोह के विरोध में जारी बयान भी ‘हलफ़ में अटकी’

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rahul gandhi-03जेएनयू में देशद्रोह की घटनाओं के सीधे विरोध से बचते नज़र आए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, सीधे आलोचना की जगह मोदी और एबीवीपी पर ही हमला

नई दिल्‍ली। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ‘वोटतंत्र’ की ऐसी खेती करने का प्रचलन शुरू हो गया है, जिसमें अब देश ही खारिज़ हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी में जेएनयू जैसे प्रसिद्ध सावर्जनिक संस्थान में जिस तरह से भारत के विरोध में आवाज़ बुलंद किया गया, उससे सवाल यह पैदा हो गया है कि फिर पाकिस्तानी आतंकियों, नक्सलियों को मारने का क्या फायदा, जब देश में ही जनता के पैसे पर चल रहे संस्थानों में चंद देशद्रोही भारत माता के इज्जत को तार-तार कर रहे हैं। लेकिन, जैसे ही ऐसे देशद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई, कांग्रेस जैसी पार्टी के शीर्ष नेता ऐसी घटनाओं की सीधी आलोचना से बचते नज़र आए। देशद्रोह करने वालों की सीधी निंदा और कठोर कार्रवाई की मांग की जगह ‘अगर-मगर’ शुरू कर दी गई।

इस कड़ी स्वयं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सीधी आलोचना से बचते नज़र आए। शुक्रवार को अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने सीधी आलोचना की जगह उन्होंने कहा, मोदी सरकार और एबीवीपी जेएनयू जैसे संस्थान पर सिर्फ इसलिए धौंस जमा रहे हैं कि यह उनके अनुसार नहीं चल रहा। यह पूरी तरह से निंदनीय है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘‘भारत विरोधी भावना स्वीकार्य होने का कोई सवाल ही नहीं है जबकि असहमति और चर्चा का अधिकार लोकतंत्र का आवश्यक तत्व है।’’ जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटे बाद राहुल की टिप्पणी आई है। संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम को लेकर कुमार पर यह आरोप लगाया गया है।
While Anti-India sentiment is unquestionably unacceptable, the right to dissent & debate is an essential ingredient of democracy (1/2)

— Office of RG (@OfficeOfRG) February 12, 2016

Modi Govt & ABVP bullying an institution like JNU simply because it won’t toe their line is completely condemnable (2/2)

— Office of RG (@OfficeOfRG) February 12, 2016

देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह एक बहुत गंभीर आरोप है और भाजपा को इसके तहत कार्रवाई करने से पहले सोचना चाहिए।

इससे पहले दिन में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राजनाथ सिंह ने कथित तौर पर भारत विरोधी गतिविधि में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की हिमायत की।

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में पिछले साल दलित शोधार्थी रोहित वेमुला की आत्महत्या पर प्रदर्शनों में अहम भूमिका निभाई थी।
 

 

टेरी ने पचौरी को अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेजा

नई दिल्ली। पर्यावरण संस्था टेरी के कार्यकारी अध्यक्ष आर.के.पचौरी को संस्था ने शुक्रवार को लंबी छुट्टी पर भेज दिया। उन पर अपनी कनिष्ठ महिला सहकर्मी के यौन उत्पीड़न का मामला चल रहा है। उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला उन्हें संस्था के उपाध्यक्ष पद पर प्रोन्नत किए जाने के कुछ ही दिन बाद किया गया।
टेरी ने बयान में कहा है, “1982 से संस्था के प्रमुख रहने वाले आर.के.पचौरी टेरी, टेरी गवर्निग काउंसिल और टेरी युनिवर्सिटी से छुट्टी पर रहेंगे। मामले के अदालत में विचाराधीन होने को देखते हुए यह फैसला गवर्निग काउंसिल द्वारा इसकी पुनर्समीक्षा तक बना रहेगा।”

बयान में कहा गया है कि पूर्व वित्त सचिव और प्रतिस्पर्धा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक चावला टेरी के नए अध्यक्ष होंगे। बयान में कहा गया है कि संस्था के नए महानिदेशक अजय माथुर को काउंसिल में शामिल किया गया है और उनके पास पूरे कार्यकारी अधिकार होंगे।

शरीफ को बधाई, मुझ पर हमला करते हैं मोदी : केजरीवाल

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकारी संघवाद’ के वादे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को तो जन्मदिन की बधाई देते हैं, लेकिन उन पर हमले बोलते हैं। अपनी आम आदमी पार्टी सरकार का एक साल पूरा होने पर केजरीवाल ने आउटलुक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा, “आप (मोदी) जाते हैं और नवाज शरीफ को हैप्पी बर्थडे कहते हैं। और मुझ पर हमला बोलते हैं। क्या मैं पाकिस्तान से भी खराब हूं?”
केजरीवाल ने आप सरकार की केंद्र के साथ लगातार जारी तकरार के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सहकारी संघवाद को दिल्ली में सिर के बल खड़ा कर दिया है।

केजरीवाल ने कहा, “सहकारी संघवाद एक ढकोसला है। बेवकूफ बना रहे हैं सारी दुनिया को।”

केजरीवाल ने पूछा, “केंद्र ने अर्धसैनिक बल भेजकर हमारे भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) को हड़प लिया। क्या यही सहकारी संघवाद है? उपराज्यपाल कृषि भूमि सर्किल रेट बढ़ाने के मेरे आदेश को रद्द कर देते हैं। क्या यही सहकारी संघवाद है? अगर मैं किसी अधिकारी का तबादला करता हूं या उस पर कार्रवाई करता हूं तो वे इसे अवैध घोषित कर देते हैं। क्या यही सहकारी संघवाद है?”

दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने पर फरवरी 2015 में मोदी ने केजरीवाल को चाय पर बुलाया था। लेकिन, केजरीवाल ने कहा कि अगस्त में प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए उन्हें दो महीने इंतजार करना पड़ा था।

केजरीवाल ने कहा कि बीते छह महीने में उनकी और मोदी की कोई औपचारिक मुलाकात नहीं हुई है।

यह पूछने पर कि उन्हें क्यों लगता है कि भाजपा उनसे संघर्ष की मुद्रा में है, केजरीवाल ने कहा, “इसका कोई जवाब नहीं है..सिवाय बदले के (दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप के हाथों भाजपा की करारी शिकस्त का बदला)।”

केजरीवाल ने कहा, “इसका कोई राजनैतिक और तार्किक अर्थ नहीं बनता। इसका कोई भी तुक नहीं बनता।”

उन्होंने कहा, “यह पीएमओ है, खासकर नृपेंद्र मिश्रा (प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव) जो पूरे अभियान (सरकार गिराने के) का संचालन कर रहे हैं।”

केजरीवाल ने मई 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से केंद्र सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, “बीते दो साल की घटनाएं डर पैदा करती हैं। असहिष्णुता का मुद्दा..लोग इसे धार्मिक कट्टरता, सांप्रदायिकता कहते हैं। मैं इसे गुंडागर्दी कहता हूं।”

केजरीवाल ने कहा, “उन्हें किसी धर्म या समुदाय की चिंता नहीं है। अगर आप कुछ ऐसा कहते हैं या करते हैं जो उन्हें पसंद नहीं है तो वे आपको सबक सिखाएंगे। यही सबक वे देना चाहते हैं।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, “(अभिनेता) आमिर खान की क्या गलती थी? उन्होंने सिर्फ यह कहा था कि उनकी पत्नी सुरक्षित नहीं महसूस करती। प्रधानमंत्री की हैसियत से उन्हें उनके यहां दो गार्ड भेजने चाहिए थे। बजाए इसके इन्होंने उनके (आमिर के) सभी विज्ञापन और कांट्रैक्ट रद्द कर दिए।”

केजरीवाल ने इस बात से इनकार किया कि उनकी कोई राष्ट्रीय राजनैतिक इच्छा है। लेकिन, उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव में भी आम आदमी पार्टी दिल्ली जैसी जीत हासिल करने जा रही है। उन्होंने कहा कि वह पंजाब चुनाव पर ध्यान देने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ेंगे।

बिहार में गोली मारो ‘सरकार’ : राज्य के भाजपा उपाध्यक्ष की गोली मारकर हत्या

दिनदहाड़े सरेआम बिहार के भाजपा उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की हत्या, 24 घंट में दो भाजपा नेताओं की हत्या

आरा। बिहार में हत्या ‘बाएं हाथ का खेल’ हो गया है। छपरा में बीजेपी नेता की हत्या के बाद अब भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हथियारबंद बदमाशों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की शुक्रवार को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। विशेश्वर बिहार विधानसभा चुनाव भी भाजपा की टिकट पर लड़ चुके हैं। हत्या की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।

बताया जाता है कि विशेशवर ओझा अपने वाहन से कहीं जा रहे थे, तभी सोनवर्षा बाजार में हथियारबंद बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर कर उन्हें मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया। 24 घंटे भी नहीं कि राज्य में दो भाजपा नेता की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। बिहार में नई सरकार बनने के बाद बिहार में हत्याओं का जैसे बाढ़ आ गया है। रोजाना हर जिले में हो रही हत्या से लोग डर के साये में जी रहे हैं। आखिर ये हत्याएं कौन कर रहा है या किसके बल पर किया जा रहा है, इस बारे में कोई जांच-पड़ताल नहीं हो रही है। पुलिस अपनी सुविधा के अनुसार काम करती दिखाई पड़ रही है।

विदित हो कि दरभंगा में दो इंजीनियरों की सरेआम हत्या का मुख्य आरोपी अबतक फरार है जबकि नीतीश सरकार घटना के समय बड़े-बड़े दावे कर रही थी। सवाल यह भी है जब सरकार और मुख्यमंत्री के पूरा जोर लगाने के बाद भी हत्याओं के आरोपियों पकड़ने में एसआईटी नाकाम है तो क्या यह नहीं माना जाए अब बिहार पूरी तरह जंगलराज की गिरफ्त में है।
 

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