उत्तर-पूर्वी भारत के वन अभ्यारण्य

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रितेश रांगड़ा।

यह कहा जा सकता है कि आदिगुरु शंकराचार्य के चार मठों की स्थापना का उद्देश्य पूरे भारत को तीर्थ यात्रा के माध्यम से जोड़ना था। आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठ सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से हमें एक दूसरे से जोड़ते हैं। जिससे समस्त देश के नागरिक एकता का अनुभव करते हैं। लेकिन पिछले कई दशकों से हमारे देश का उत्तर-पूर्वी भाग देश से अलग-थलग पड़ा है। जिसके कारण इस क्षेत्र से हमारा संपर्क टूट गया है। इसके साथ ही साथ इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर्यटन से भी हमारा संपर्क टूट सा गया है। अगर हम इस क्षेत्र के इन वन अभ्यारण्यों के बारे में लोगों को जानकारी दें तो हो सकता है देश के बाकी हिस्सों से इसे जोड़ने में यह जानकारी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सके। आईए जानते हैं इस क्षेत्र के विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों के बारे मेंः-

नमदाफा राष्ट्रीय उद्यान
नमदाफा राष्ट्रीय उद्यान अरुणाचल प्रदेश में स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान पूर्वी हिमालय जैव विविधता स्थल का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का तीसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।

यह पूर्वी हिमालय उप क्षेत्र में स्थित है और इसे भारत में जैव विविधता में सबसे धनी क्षेत्रों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह उद्यान अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग ज़िले में म्यांमार की सीमा के पास स्थित है। सप्रिया हिमालयनाफूल रेड ग्लिट नाम की उड़ने वाली गिलहरी अधिक पाई जाती है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य के गोलाघाट और नागांव जिलों में स्थित एक राष्ट्रीय पार्क है। यह भारत में आरक्षित वन क्षेत्र में से एक है। इस उद्यान की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहां दुनियां के दो तिहाई एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। वर्ष 1905 में स्थापित इस उद्यान ने 2005 में शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया। जिसके बाद यूनेस्को द्वारा इसे विश्‍व धरोहरों में से एक घोषित कर दिया गया है। काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है। काजीरंगा में विभिन्न प्रजातियों के बाज, विभिन्न प्रजातियों की चीलें और तोते आदि भी पाये जाते हैं।

यह पूर्वी हिमालय उप क्षेत्र में स्थित है और इसे भारत में जैव विविधता में सबसे धनी क्षेत्रों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह उद्यान अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग ज़िले में म्यांमार की सीमा के पास स्थित है। सप्रिया हिमालयनाफूल रेड ग्लिट नाम की उड़ने वाली गिलहरी अधिक पाई जाती है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य के गोलाघाट और नागांव जिलों में स्थित एक राष्ट्रीय पार्क है। यह भारत में आरक्षित वन क्षेत्र में से एक है। इस उद्यान की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहां दुनियां के दो तिहाई एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। वर्ष 1905 में स्थापित इस उद्यान ने 2005 में शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया। जिसके बाद यूनेस्को द्वारा इसे विश्‍व धरोहरों में से एक घोषित कर दिया गया है। काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है। काजीरंगा में विभिन्न प्रजातियों के बाज, विभिन्न प्रजातियों की चीलें और तोते आदि भी पाये जाते हैं।
इस राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक परिवेश वनों से युक्‍त है, जहां बड़ी एलिफेंट ग्रास, मोटे वृक्ष, दलदली स्‍थान और उथले तालाब हैं। एक सींग वाला गैंडा, हाथी, भारतीय भैंसा, हिरण, सांभर, भालू, बाघ, चीते, सुअर, बिल्ली, जंगली बिल्‍ली, हॉग बैजर, लंगूर, हुलॉक गिब्‍बन, भेडिया, साही, अजगर और अनेक प्रकार की चिडियाँ, जैसे- ‘पेलीकन’ बत्तख, कलहंस, हॉर्नबिल, आइबिस जलकाक, अगरेट, बगुला, काली गर्दन वाले स्‍टॉर्क, लेसर एडजुलेंट, रिंगटेल फिशिंग ईगल आदि बड़ी संख्‍या में पाए जाते हैं।

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान भारत में असम राज्य के पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट में स्थित जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है। मुख्यतः नमीदार मिश्रित अर्ध-सदाबहार वन, नमीदार मिश्रित पतझड़ीय वन तथा घास के मैदानों का यह क्षेत्र असम के तिनसुकिया ज़िले में स्थित है। डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान विश्व के 19 जैव विविध हॉट स्पॉट वाले क्षेत्रों में से एक है। ब्रह्मपुत्र के गोद में स्थित डिब्रू-सैखोवा दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों और जैविक विषमताओं को समेटे हुए है।

यह क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौन्दर्य और विविध वन्य-जीवन के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। विश्व के अनेक देशों से पर्यटक और विज्ञानी यहां घुमने और अध्ययन के लिए आते हैं। जंगली घोड़ा और वुड डक इस पार्क के मुख्य आकर्षण है। बारहमासी बड़ी नदियां और अत्यधिक वर्षा यहां के वनस्पति को सदाबहार और चमकीला बनाये रखता है और वन्य जीवन भी लाभान्वित होता है।

नमेरी राष्ट्रीय उद्यान

नमेरी राष्ट्रीय उद्यान भारत के असम राज्य के शोणितपुर ज़िले में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है। यह पूर्वी हिमालय के गिरिपीठ में स्थित है और असम के तेज़पुर शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर है।

राष्ट्रीय पार्क लगभग 200 वर्ग कि.मी क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी उत्तरी सीमायें अरुणाचल प्रदेश के पाखुइ वन्यजीव अभयारण्य के साथ जुड़ी हुई हैं। निचले हिमालय की तलहटी पर स्थित नमेरी राष्ट्रीय उद्यान विविध वनस्पतियों और जीवों की कई प्रजातियों का आश्रय स्थल है।

पार्क में हाथी बड़ी संख्या में हैं, जबकि यह तेंदुए, जंगली काले भैंसे, काले भालू, जंगली सूअर, कैप्ड लंगूर आदि का भी वास स्थल है। पर्यटक यहां हार्नबिल्स, प्लोवर, वुड बतख, पतेना और बकवादी जैसे पक्षियों को देखने का भी आनंद ले सकते हैं। पार्क के अंदर प्रवाहित होने वाली कई छोटी छोटी नदियों का भी पर्यटक लुत्फ उठा सकते हैं।

यह स्थान मछली पकड़ने के लिए भी काफी लोकप्रिय है क्योंकि मछली पकड़ने के लिए एक आदर्श स्थल है। इस पार्क की यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय नवम्बर से मई तक है। पर्यटक गुवाहाटी (198 किलोमीटर) से सीधे पार्क पहुंच सकते हैं या रास्ते में तेजपुर में ठहराव लेकर भी यहां पहुंचा जा सकता है।

 

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