‘पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण खुद ही किनारे लग गए शरद यादव’

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नई दिल्ली। जदयू का भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने और एनडीए में शामिल होने के बाद शरद यादव के तेवर बगावती हो गए हैं। शरद यादव जदयू को नीतीश को नहीं अपनी पार्टी बता रहे हैं और इसे वे चुनाव आयोग में चुनौती देने की भी कवायद में लगे हैं। लेकिन जेडीयू ने कहा है कि पार्टी में कोई विभाजन नहीं हुआ है। शरद यादव के साथ बसएक-दो लोग ही है। इससे पार्टी विभाजित नहीं हो जाती।
जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी ने कहा था कि शरद यादव के लोग विभाजन को लेकर भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। केसी त्यागी ने कहा कि शरद यादव पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण खुद ही पार्टी से दूर हो गए हैं।
शनिवार को पटना में जदयू कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी को एनडीए में शामिल कर लिया गया। संभव है, जदयू केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल हो। लेकिन, जदयू का मानना है कि भ्रष्टाचार में डूबे लालू के साथ जाना शरद यादव का जाना राजनीतिक तौर पर उनकी हताशा है। हालांकि, बैठक में माना जा रहा है कि शरद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया जाए।
जदयू के तरफ से कहा जा रहा है कि लोकसभा व राज्यसभा में उनके 11 सांसद हैं जिनमें से एक खुद शरद यादव व अली अनवर को छोड़कर कोई भी नके साथ नहीं है। बिहार में 71 विधायकों में से एक विधायक शरद के साथ नहीं हैं।
जदयू की तरफ से कहा गया है कि मात्र पांच राज्यों में जेडीयू स्टेट यूनिट को मान्यता प्राप्त है। यह राज्य हैं बिहार, झारखंड, केरल, जम्मू कश्मीर और दादर और नगर हवेली। उन्होंने कहा कि केरल की यूनिट वीरेंद्र कुमार के साथ है और बाकी सभी राज्य इकाईयां नीतीश कुमार के साथ हैं। जेडीयू के 10 महासचिव में से 7 नीतीश कुमार के साथ हैं।

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