बाहरी छात्रों पर जुल्म-ओ-सितम जारी, NIT के दबाव में 1500 छात्र अपने घरों को रवाना हुए

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एनआईटी प्रशासन ने छात्रों के सामने शर्त रखी, छात्रावास में रहना है तो परीक्षा देना होगा, छात्रों ने घर जाना ही उचित समझा 

छात्रों को कहना है पिछले 12-15 दिनों से सब अस्त-व्यस्त है, तनाव के इस माहौल में परीक्षा देना संभव नहीं    

श्रीनगर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर में छात्रों पर एनआईटी प्रशासन का दवाब जारी है। जो कैंपस में पाकिसतान का झंडा लहरा रहे थे और जीवे-जीवे पाकिस्तान कर रहे थे उन कश्मीरी (जिन्हें छात्र भी कहना छात्र बिरादरी के साथ नाइंसाफी होगा) पर कोई कुछ नहीं बोल रहा। एनआईटी प्रशासन भी नहीं और राज्य सरकार नहीं। लेकिन जिनके हाथ तिरंगा छीन कर ले गए उन छात्रों को अब तक निशाने पर रखा जा रहा है।

यह हालत तब है जब एनआईटी केंद्र सरकार के अधीन है। सवाल यह भी है कि वो तब भी केंद्र सरकार के अधीन था, जब कैंपस में वेस्टइंडीज की जीत और भारत की हार के बाद पाकिस्तान के नारे लगे। पाकिस्तान का झंडा कैंपस के चौराहे पर गाड़ दिया गया। बाहरी छात्रों को भारतीय कहकर गाली दी गई। यह सियासत है, इसका तो यही रोना है। इसी सियासत से देश बंटा और आधा कश्मीर भी। और जो है वह सलाना करीब 70 हजार करोड़ रुपए देश से लेकर देश को ही गाली देता है। रोजाना पाकिस्तान का झंडा फहराता है। ऐसी सियासत आप दुनिया के किसी देश में नहीं देख सकते।

सवाल यह भी जम्मू-कश्मीर में करीब 8 लाख सेना की तैनाती के बाद भी वह है, जिसके दम पर वहां कोई पाकिस्तान का झंडा लहरा देता है और कोई कुछ नहीं करता। यह कौन है जो आदत बिगाड़कर उन्हें इतनी ताकत दे दिया है कि सेना के जवान आंतकियों को घेरे रहते हैं वहीं, एकत्रित होकर कश्मीरी मुसलमान मस्जिदों और सड़क से भारतीय सेना के विरोध में नारेबाजी करते हैं। आतंकियों के समर्थन में पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगता है।

बहरहाल, कश्मीर में चल रही उपरोक्त लिखे गए सब कारणों, कुव्यवस्थाओं, देशद्रोही राजनीति को देख कर करीब 1,500 गैर स्थानीय छात्रों ने मंगलवार को छात्रावास के अपने कमरे खाली कर घरों के लिए रवाना होने में ही भलाई समझी। विद्यार्थियों ने कहा कि प्रशासन ने उनसे कहा है कि अगर वे परिसर के भीतर रहेंगे तो उन्हें परीक्षा में बैठना पड़ेगा।

नाम न छापे जाने की शर्त पर विद्यार्थियों ने बताया, “हमारे प्रशासन ने कहा था कि हम छात्रावास में रहते हैं, इसलिए हमें परीक्षा में बैठना होगा, लेकिन हमने परीक्षा की तैयारी नहीं की है। क्योंकि, हम विरोध प्रदर्शन में व्यस्त थे।” साथ ही बताया, जो विद्यार्थी परिसर में नहीं हैं, उनकी परीक्षा बाद में ली जाएगी।”

एक विद्यार्थी जो सोमवार को ही घाटी से रवाना हो गया था, उसने कहा, “करीब 1,000-1,500 विद्यार्थियों ने तड़के पांच बजे से पहले छात्रावास छोड़ दिया और वे अपने घरों के लिए रवाना हो गए।”

एनआईटी-श्रीनगर में करीब 1500 गैर स्थानीय विद्यार्थी हैं, जो पिछले सप्ताह गैर स्थानीय छात्रों के एक समूह और कश्मीर की पुलिस की लाठीचार्ज के बाद से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। और उन्हीं छात्रों ने संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों के रवैयों से अपने को असहाय पाते हुए अपने घर की ओर निकलने के अलावा और कोई चारा नहीं पाया।

 

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