…लकीर पीटना बिहार सरकार व प्रशासन की पुरानी आदत !

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शहाबुद्दीन और सीवान जेल में गतिविधियों को लेकर इतनी सक्रियता पहले दिखाई गई होती तो पत्रकार राजदेव की जान नहीं जाती,  सीवान जेल में प्रशासन की छापेमारी में फिर पकड़े गए 17 मोबाइल, बुधवार को पकड़े गए था 40 मोबाइल

पटना/दिल्ली (रिपोर्ट4इंडिया)। लालू के शासनकाल में सूत्र बताते रहते थे कि बिहार में कई आपराधिक घटनाओं की पूर्व जानकारी नेताओं को भी रहती है और प्रशासन को भी। हालांकि, वह युग मोबाइल का नहीं था और न ही इतने छोटे-छोटे  कैमरों की जिससे की इस संबंध में पुख्ता प्रमाण सामने आ सके। आज भी खबरें आती रहतीं है कि सरकार में मंत्री और अपराधी किस तरह से एक-दूसरे से मिलते और किस एक-दूसरे का सपोर्ट लेते रहे हैं। राजद की हिस्सेदारी में नई सरकार के आने के बाद बाहुबली शहाबुद्दीन का सीवान जेल लाया जाना साफ संकेत था कि जिले सहित राज्य में आपराधिक गतिबिधियों में तेजी होगी। क्राइम से जुड़ा रहा गिरोह गोलबंद होगा, शार्प शूटर ईशारा पाकर हत्या को अंजाम देंगे। लेकिन, अगर सब कुछ सरकार के कार्यप्रमाणा से ही ऐसा होगा तो फिर उसे रोकने वाला कौन होगा? जैसा कि नई सरकार के आने के बाद और सीवान जेल में शहाबुद्दीन के जाने के बाद सीवान में लगातार हत्याएं हुईं। इन आपराधिक घटनाओं पर विपक्षी दलों समेत राज्य के लोगों ने भी आरोप लगाए हैं।

सीवान जेल राजद के मंत्री और शहाबुद्दीन के मिलने और जेल में पार्टी करने की रिपोर्टिंग के बाद पत्रकार राजदेव से कई बार मारपीट, धमकी व बदतमीजी की गई। पुलिस ने इन पर कोई संज्ञान नहीं लिया। कारण की शहाबुद्दीन सीवान जेल में ही प्रशासन का मालिक बनकर विराजमान था। सजायाफ्या से जेल में जाकर मंत्री का मिलना इसका प्रमाण है। अब सीवान जेल से शहाबुद्दीन को शिफ्ट किया जाना, लगातार जेल में रेड मारना और उसके बावजूद हर बार दो दर्जन से ज्यादा मोबाइल का बरामद होना, यह सक्रियता ‘सांप के चले जाने के बाद लकीर पीटने’ जैसा ही है। अगर यह सक्रियता पहले दिखाई जाती तो संभव है भाजपा नेता श्रीकांत व पत्रकार राजदेव की जान बच जाती।

राजदेव रंजन हत्याकांड के बाद से सीवान जिला जेल में लगातार छापेमारी की जा रही है। शनिवार को भी रात 10 बजे से 11 बजे तक प्रशासन ने छापेमारी की। एसपी, डीएसपी सहित जिले के तमाम आलाधिकारियों द्वारा की गई छापेमारी में 17 मोबाइल समेत कई आपत्तिजनक चीजें बरामद की गई हैं।

लगातार हो रही छापेमारी में जेल से मिल रही मोबाइल और आपत्तिजनक वस्तुएं जेल प्रशासन पर सवालिया निशान खड़ा लगा रही हैं। सीवान मंडल कारा आपराधिक गतिविधियों को लेकर हमेशा ही चर्चा में रहा है।

पत्रकार हत्याकांड के तार सीवान जेल में बंद रहे पूर्व आरजेडी सांसद व बाहुबली शहाबुद्दीन से जुड़ने के बाद से जेल में लगातार छापेमारी की जा रही है। बीते बुधवार को हुई छापेमारी में भी 40 मोबाइल जब्त किए गए थे। साथ ही शहाबुद्दीन से मिलने आए कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद शहाबुद्दीन को भागलपुर और जेल में बंद कुछ अन्य अपराधियों को प्रदेश के दूसरे जेलों में स्थानांतरित किया गया था।

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