वित्तमंत्री ने माल्या का के बयान को खारिज किया कहा, झूठ बोल रहा

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arun-jetly-on-2-Gवित्तमंत्री अरूण जेटली से मिल मामले में सेटलमेंट कराने की शराब कारोबारी विजय माल्या के दावे से भारतीय राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। राजनीति देखिए कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रीत्व काल में माल्या को भारी-भरकम कर्ज देने वाली कांग्रेस भी माल्या के विदेश भाग जाने पर मोदी सरकार पर निशाना साध रही है। माल्या के बायन के बाद तो जैसे कांग्रेस को मुंहमांगी मुराद मिल गई हो और उसने बीजेपी पर हमला तेज कर दिया है। हालांकि, इस मामले में वित्तमंत्री अरूण जेटली ने तुरंत सफाई दी और कहा कि राज्यसभा सांसद होने से मिले विशेष अधिकार का माल्या ने संसद में गलत फायदा उठाने की कोशिश की थी। वे पूरी तरह से झूठ बोल रहे हैं। दरअसल, माल्या ब्रिटेन कोर्ट में ऐनकेन प्रकारेण बचने की कोशिश कर रहा है ताकि उसे भारत प्रत्यारोपित न किया जाए।   

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। बैंकों का पैसा लेकर भारत से भागे शराब कारोबारी विजय माल्या ने अपने को बचाने के लिए लंदन के वेस्टमिस्टर कोर्ट में एक बड़ा बयान दिया है। माल्या ने दावा किया कि वह भारत छोड़ने से पहले वित्तमंत्री से मिलकर बैंकों से सेटलमेंट की कोशिश की थी लेकिन बैंकों ने इसपर सवाल खड़े कर दिए थे। माल्या के इस वयान पर बवाल मच गया है। हालांकि, तुरंत इस पर वित्त मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी और माल्या के बयान को पूरी तरह से झूठा करार दिया।

वित्त मंत्री ने कहा, 2014 में मैंने माल्या को मिलने के लिए कोई समय नहीं दिया। इसलिए उनसे मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हालांकि, जब वह राज्यसभा के सदस्य थे, तो वे सदन की कार्रवाई में शामिल होते थे। और एक मौके पर जब मैं सदन से अपने कमरे की तरफ जा रहा था तब उन्होंने प्रिविलेज का गलत इस्तेमाल किया।’

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अपने फेसबुक पेज पर जेटली ने कहा, ‘वह मेरे पास आए और कहा कि वह सेटलमेंट के लिए एक ऑफर तैयार कर रहे हैं। इस पर मैंने उनसे कहा था कि इस बारे में मुझसे बात करने की कोई जरूरत नहीं है, उन्हें बैंकों से बात करनी चाहिए। मैंने वह कागज भी नहीं लिए जो माल्या अपने हाथों में लिए हुए थे और मुझे देने की कोशिश कर रहे थे।’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘केवल इस एक वाक्य के अलावा मेरा उनसे कोई संवाद नहीं हुआ। और यह भी उन्होंने राज्यसभा का सदस्य होने के नाते मिले प्रिविलेज का गलत इस्तेमाल किया।’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा विजय माल्या की उनसे पिछले 4-5 सालों के दौरान कोई मुलाकात नहीं हुई।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को प्रत्यर्पण के मामले की सुनवाई के दौरान शराब कारोबारी विजय माल्या लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में कहा कि भारत छोड़ने से पहले उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी और बैंकों के कर्ज के सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा था।

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