स्वदेसी के नाम पर बड़े ‘व्यवसायी बने बाबा’

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baba-ramdev-1पतंजलि अपना मुनाफा ग्राहकों से नहीं बांटती

अपेक्षाकृत महंगा है पतंजलि के उत्पाद

नई दिल्ली/रिपोर्ट4इंडिया। योग से व्यवसायी बने बाबा रामदेव का अब पूरा ध्यान बाजार से जबरदस्त मुनाफा कमाने का हो गया है। मल्टीनेशनल कंपनियों को भगाने और स्वदेशी का नारा देकर बाजार में दस्तक देने वाले रामदेव बाबा की कंपनी पतंजलि दोनों हाथ से मुनाफा बटोर रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कंपनी उपभोक्तओं का लाभ का कोई भी हिस्सा कभी भी शेयर नहीं करती। जबरदस्त मुनाफे का ही परिणाम है कि अब बाबा रामदेव ने भारत की सबसे बड़ी जनरल स्टोर्स कंपनी बिग बाज़ार के साथ समझौता किए हैं। भावनात्मक रूप से पहले भारतीय ग्राहकों को योग-स्वदेशी के नाम पर पतंजलि ने अपने साथ जोड़ा और फिर अब मोटा मुनाफा वसूलने का खेल बेरोक-टोक चल रहा है।

दो हजार करोड़ से पार का है बाबा का व्यवसाय

पतंजलि ने अपने व्यवसाय को बहुत बड़ा किया है और सालाना टर्नओवर में भी लंबी छलांग मारी है। साल 2012 में रामदेव के पतंजलि आर्युवेद कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 450 करोड़ था। 2013 में टर्नओवर दोगुने से थोड़ा कम 850 करोड़ पहुंचा, 2014 में सालाना टर्नओवर 1200 करोड़ पर पहुंच गया और 2014-15 वित्तीय वर्ष में कंपनी का सालाना टर्नओवर 67 फीसदी की छलांग के साथ 2000 करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद है।

बिग बाजार के साथ करीब 20 फीसद लाभ का शेयर, कीमतें बढ़ेंगी

बाबा ने बिग बाजार के साथ जो समझौता किया है, अनुमान लगाया गया है कि मात्र 20 माह में ही कंपनी का बिग बाजार के साथ व्यवसाय एक हजार करोड़ का होगा। सूत्र बताते हैं कि इस समझौते से बाबा रामदेव अपने मुनाफे का लगभग 20 फीसद बिग बाजार के साथ शेयर करेंगे। इसके लिए कृत्रिम तरीके से पतंजलि उत्पादों की कीमत भी बढ़ाई जाएगी। यानी बाबा अपना लाभ कम नहीं करेंगे, बल्कि अपना और बिग बाजार के लाभ को बढ़ाने के दृष्टिगत कीमतें अधिक होंगी।

वैसे भी पतंजलि का दंत कांति, साबून और कॉस्मैटिक उत्पादों के क्वालिटी के आधार पर देखें तो मूल्य दूसरी अन्य जानी-पहचानी कंपनियों के उत्पादों से कम नहीं है। दूसरी कंपनियां समय-समय पर बिक्री को बढ़ाने के लिए या फिर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए गिफ्ट ऑफर करतीं हैं पर, बाबा रामदेव ऐसे किसी भी प्रकार से ग्राहकों से अपने लाभों का बंटवारा नहीं करते।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के नाम पर कारोबार करने वाले बाबा रामदेव 15 अक्टूबर से नए उत्पाद नूडल्स लांच करने जा रहे हैं। उनका प्रयास है कि मैगी के रिक्त स्थान को वे भर लें। बाबा ने प्रोडक्ट की जो शुरुआती कीमत रखी है वह भी महंगी है। सौ ग्राम के नुडल्स की कीमत बाजार में अन्य कंपनियों के 10 से 15 रुपए के बीच में है जबकि बाबा इसे 15 रुपए में बेचेंगे। असल में यह पूरी तौर पर भारतीय ग्राहकों को भावनात्मक रूप से शोषण करने का बाबा का उपक्रम है, जिसे आयुर्वेद के दिशा-ज्ञान से भरमाने की कोशिश होगी। साथ ही पतंजलि नुडल्स के साथ पास्ता, ओट्स, जूस और मुसली जैसे उत्पादों की लांच की भी तैयारी है।

श्रम नियमों का परवाह नहीं!

बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद के साथ ही कम से कम 35 कंपनियां हैं जो विभिन्न उत्पादन करतीं हैं। इन कंपनियों में श्रमिकों के नाम पर बाबा के भगवाधारी हैं जो कैंपस में ही रहते-खाते हैं और मामली पारिश्रमिक पर काम करते हैं। सूत्र बताते हैं कि ये काम करने वाले सभी शिष्य परंपरा से ओत-प्रोत होते हैं। इसलिए नियमानुसार श्रम नियमों का पालन नहीं होता है। इतनी बड़ी संस्था में प्रोडक्ट बनाने वाली बाबा की कंपनी अब तक यह नहीं बता पाई है कि उनके कंपनियों में कितने कर्मचारी किस-किस वेतनमान पर काम करते हैं।

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