हम तो लिखेंगे- ‘यह भी एक अपराध व भ्रष्टाचार है मोदीजी’

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sanjeev chaturvedi.01एम्स में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले ईमानदार अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को किया जा रहा प्रताड़ित

एम्स में सीवीओ के पद पर कार्य करते भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले आईएसए अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को आपके राज में एक साल से अधिक समय से कोई काम नहीं दिया जा रहा, क्या इसीलिए कि वे दोबारा किसी भ्रष्ट काम का पोल न खोल दें?

संजीव ने बार-बार स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिख काम आवंटित करने का अनुरोध किया पर पर काम नहीं दिया जा रहा, क्या स्वास्थ्य मंत्री के ईशारे पर ऐसा हो रहा?

संजीव प्रधानमंत्री नहीं पर अपने काम और ईमानदारी में ‘प्रधानमंत्री’ से कम भी नहीं

संजीव चतुर्वेदी ने कैबिनेट सचिव को लिखा है, मैं बिना काम 2014 से करीब एक लाख से अधिक वेतन ले रहा हूं, “मुझे बिना किसी काम के पूरा वेतन दिया जा रहा है जो मेरे लिए बहुत ही अपमानजनक है।” यह वित्तीय और मानव संसाधनों की बर्बादी है और हमारे जैसे एक गरीब देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, जहां हमारी दो तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए रोज संघर्ष कर रही है”

AIIMSनई दिल्ली/रिपोर्ट4इंडिया। भ्रष्टाचार के सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी की दो बातों को मैं यहां साझा कर रहा हूं। एक तो उन्होंने कहा था, ‘न खाऊंगा और न खाने दूंगा’ और दूसरी कि, ‘मेरा क्या और हिस्सा नहीं मिलने पर मुझे क्या।’ लेकिन आपके नाक के नीचे एक ईमानदार नौकरशाह कूचला जा रहा है। उसे सिर्फ इसलिए काम नहीं दिया जा रहा है कहीं, उस काम में भ्रष्टाचार न खोज लें या फिर उस काम में कोई भ्रष्टाचार न होने दे। आपने उसी जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री बनाया, जिस पर भ्रष्टाचार को लेकर अंगुली उठे थे। अब वहीं, मंत्री ईमानदार अधिकारी को कोई काम न देकर उसे हतोत्साहित कर रहा है। ध्यान रखिए, जनता सभी चीजों को बहुत बारिकी से देखती और समझती है। यह सरकार के लिए भ्रष्टाचार से कदापि कम नहीं है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक नौकरशाह एवं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी को एक साल से अधिक समय से कोई काम नहीं दिया जा रहा है। वह अधिकारी बार-बार स्वास्थ्य सचिव व कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को एक पत्र लिखकर अपने लिए काम आवंटित करने का अनुरोध करता है। वह बार-बार कहता है कि मुझे बिना काम एक लाख से अधिक वेतन लेना ठीक नहीं लगता। इस गरीब देश में जहां की अधिकांश जनता जीवन के लिए संघर्ष करती हो।

‘दर्द-ए-दास्तां’ एम्स में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले ईमानदार अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की

sanjeev chaturvedi.02संजीव चतुर्वेदी को वर्ष 2014 में एम्स में सीवीओ का कार्यकाल समाप्त होने से बहुत पहले ही पद से हटा दिया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, चतुर्वेदी एम्स में उप सचिव के तौर पर कार्यरत हैं लेकिन उनके पास से पूर्व में आवंटित सभी काम इनसे वापस ले लिए गए।

चतुर्वेदी ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र में कहा है, “एम्स से जुड़ने के बाद मुझे संस्थान के सीवीओ का कार्यभार दिया गया। साथ ही सामान्य अनुभाग, संपत्ति खंड व शिकायत संबंधी अन्य छोटे-मोटे काम भी सौंपे गए। इन सभी कामों को किसी वजह का हवाला दिए बिना और केंद्रीय sanjeev chaturvedi-har mod di mafia ko maatस्वास्थ्य मंत्री तथा स्वास्थ्य सचिव द्वारा मेरा रिकॉर्ड उत्कृष्ट बताए जाने के बावजूद एक-एक कर मुझसे वापस ले लिया गया।”

चतुर्वेदी ने पत्र में जितनी जल्दी हो सके कैबिनेट सचिव से मुलाकात का समय भी मांगा है। चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि उनकी यह स्थिति नेताओं और नौकरशाहों के सत्ता गठजोड़ के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हुई। उन्होंने हालांकि, अपने कदमों को वाजिब ठहराया। उन्होंने कहा, “मुझे बिना किसी काम के पूरा वेतन (एक लाख से अधिक) दिया जा रहा है और मेरे लिए यह बहुत ही अपमानजनक है।” चतुर्वेदी ने लिखा, “यह वित्तीय और मानव संसाधनों की बर्बादी है और हमारे जैसे एक गरीब देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, जहां हमारी दो तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए रोज संघर्ष कर रही है।”

उन्होंने पत्र में यह भी बताया कि काम आवंटित किए जाने को लेकर किस तरह उनके बार-बार के अनुरोध को मौजूदा केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने अनसुना कर दिया।

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