अफगानिस्तान मामले में गलत-बयानी ठीक नहीं, भारत शांति वार्ता में होगा शामिल

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विदेश मंत्रालय ने विपक्ष के इस आरोप को खारिज किया कि भारत तालिबान के साथ वार्ता कर रहा है। अफगानिस्तान में शांतिवार्ता को लेकर भारत अपनी कोशिशें जारी रखते हुए रूस के साथ वार्ता में लेगा भाग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफगानी राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी के साथ (फाइल फोटो)modi--Mohammad-Ashraf-Ghani

रिपोर्ट4इंडिया नेशनल ब्यूरो।  

नई दिल्ली। अफगानिस्तान में शांति बहाली को लेकर आसन्न वार्ता पर विपक्षी दलों की तालिबान एंगल को विदेश मंत्रालय ने खारिज किया है। भारत सरकार ने साफ किया है कि भारत अपनी विदेश नीति के तहत अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने को लेकर जो उचित होगा, वह करेगा। भारत और तालिबान के साथ बातचीत को लेकर देश में सियासी हलकों में की जा रही आलोचना के बाद शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने सफाई दी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने स्पष्ट किया कि तालिबान के साथ वार्ता ‘गैर-आधिकारिक’ है। भारत अफगानिस्तान में शांति और सुलह के सभी प्रयासों का समर्थन करता है, जो एकता और बहुलता को बनाए रखेगा जिससे कि उस देश में स्थिरता और समृद्धि आ सके। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वो विदेश नीति के तहत हैं और भारत शांति की प्रक्रिया में शामिल होता रहेगा।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘भारत सरकार ने फैसला किया है कि शांति वार्ता में वह गैर-आधिकारिक तौर पर शामिल होगा। भारत यह देखेगा कि बैठक में क्या हो रहा है। विदेश मंत्रालय इस बात पर आश्चर्य जताया और बताया कि हमने कब कहा कि तालिबान के साथ बात होगी? भारत सरकार का केवल यह कहना है कि अफगानिस्तान मुद्दे पर रूस में जो बैठक हो रही है, उसमें सिर्फ शामिल होगा।’

उधर, रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस शांतिवार्ता में भाग लेने के लिए अफगानिस्तान, भारत, ईरान, चीन, पाकिस्तान, अमेरिका और कुछ अन्य देशों को निमंत्रण भेजा गया है।

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