अखिलेश : सब कुछ लुटा के ‘होश’ में आए…

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उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा गठबंधन का समझिए तो ‘द इंड’ हो गया। जिस प्रकार बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुन्य से 10 सीट जीतकर भी अखिलेश को आंख दिखा रहीं है, उसे कहते हैं ‘जूता भीगाकर मारना।’ बसपा ने सारा दोष अखिलेश के माथे पर चिपका दिया और अपने कार्यकर्ताओं के बदलने का प्रमाण पत्र भी मांग लिया। मायावती के इस रूख के बाद अखिलेश ने भी गठबंधन के बारे में सोच-विचार की बात कही।

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।  

नई दिल्ली। चुनाव में हार के बाद उत्तर प्रदेश में अनौपचारिक रूप से बसपा-बसपा गठबंधन टूट गया। सोमवार के बाद मंगलवार को मायावती की स्पष्टीकरण और उसके बाद अखिलेश यादव का बयान इस बात की पुष्टि करता है। मायावती ने ने अपनी स्पष्टीकरण में हार के लिए सीधे-सीधे अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहरा दिया। आगे गठबंधन की जारी रखने के लिए अखिलेश यादव पर अपने कार्यकर्ताओं से प्रमाणपत्र लाने की मांग कर दी कि, वे उनके साथ रहेंगे और उन्हें वोट करेंगे। मायावती का यह बयान अप्रत्याशित है। साथ ही, मायावती ने उप्र में उपचुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर दी।

मायावती के इस बदले रूख पर आखिरकार अखिलेश यादव को सफाई देनी ही पड़ गई, जिससे अबतक बचते आ रहे थे। अखिलेश यादव ने मायावती के आने वाले उपचुनाव में अकेले लड़ने के ऐलान पर कहा, अगर ऐसा है तो हम भी अकेले लड़ने की तैयारी करेंगे। साफ है, उप्र में गठबंधन खत्म हो गया है।

मायावती का आरोप, सपा का वोट छिटका  

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, चुनाव नतीजों से साफ है कि सपा का आधार वोट भी उसके साथ खड़ा नहीं हुआ। यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा उम्मीदवार चुनाव हार गए। कन्नौज में डिंपल यादव, फिरोजाबाद में अक्षय यादव, बदायूं में धर्मेंद्र यादव का हार जाना हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है।

मायावती ने कहा, जब सपा का बेस वोट ही छिटक गया है तो उन्होंने बसपा को वोट दिया होगा, यह बात सोचने पर मजबूर करती है। मायावती ने कहा, अखिलेश की जिम्मेदारी है कि वह अपने राजनीतिक कार्यों के साथ-साथ कार्यकर्ताओं और पार्टी को मिशनरी बनाते हैं तो फिर हम आगे साथ लड़ेगे अन्यथा हमें अकेले ही चुनाव लड़ना होगा।

बसपा का उपचुनाव लड़ना बड़ा संकेत

बसपा सामान्यत:  लड़ती है। लेकिन, गठबंधन के बाद मायावती ने घोषणा कर दी कि वह उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर उपचुनाव अकेले लड़ेगी। इसका साफ मतलब है, सपा चुनाव नहीं लड़े और बसपा की मदद करे। अन्यथा गठबंधन की कोई जरूरत नहीं। लोकसबा चुनाव में बीजेपी के 9 विधायक जबकि बसपा व सपा के एक-एक विधायक लोकसभा के लिए चुने गए हैं।

गठबंधन में सपा को हुआ ज्यादा नुकसान

बसपा के साथ गठबंधन के चलते समाजवादी पार्टी हाशिए पर चली गई है। 2017 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव ने लोकसभा उपचुनाव के रास्ते बसपा के साथ गठबंधन किया। परंतु, चुनाव में बसपा 0 से आगे जाकर 10  सीटें जीत गईं जबकि सपा 7 सीटों से 5 पर पहुंच गई। यहां तक कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव और परिवार के अन्य दो सदस्य चुनाव हार गए।

मायावती के बदले मिज़ाज़ के बाद अखिलेश ने कहा है कि वह अगली लड़ाई अपने संसाधन और अपने साधन से लड़ेंगे। उन्होंने कहा, गठबंधन के बारे में सोचकर विचार करेंगे। अगर रास्ते अलग हैं तो हम भी लोगों का स्वागत करेंगे। उपचुनाव में अगर अकेले लड़ने का फैसला हुआ है, तो फिर हम भी अकेले ही चुनाव लड़ने की तैयारी करेंगे।

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