रेल प्रशासन हो अथवा सरकार हर कोई झूठ बोल रहा, पल्ला झाड़ रहा

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अमृतसर हादसे में रेल राज्यमंत्री और रेलवे प्रसाशन लगातार झूठ बोल रहा। हादसे के दोनों तरफ करीब आधे किमी. तक पटरी बिल्कुल सीधी है। फिर रेल राज्यमंत्री और ड्राइवर की पटरी धुमावदार होने की दलील पल्ला झाड़ने के अलावा और कुछ नहीं   

अमृतसर ट्रेन हादसे की जगह शनिवार को जमा भीड़।amritsar-train-accident

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली (आउटपुट-अमृतसर)। अमृतसर रेल हादसे को लेकर जैसे-जैसे तस्वीरें साफ हो रही हैं, सरकारों, प्रशासन और सिस्टम का झूठ बेनकाब हो रहा है। लोगों की भीड़ को गाजर-मुली की तरह काटने वाले ड्राइवर से लेकर मौके पर शुक्रवार रात को ही पहुंचे रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी सब झूठ बोल रहे हैं। पूरा सिस्टम ही पल्ला झाड़ने की कोशिश में लगा है। पंजाब सरकार और अमृतसर पुलिस-प्रशासन से तो किसी तरह की उम्मीद बोमानी है। स्थानीय प्रशासन और सरकार उस रावण से भी गए-गुजरे हैं, जिसे त्याज्य समझकर समाज हर बार जलाता है। वह रावण भले ही सीता को अपहरण कर अपनी लंका ले गया, परंतु बिना सीता की आज्ञा के उसने कोई भी गलत कदम नहीं उठाया।

पंजाब सरकार और अमृतसर प्रशासन 60 से ज्यादा लोगों को मार कर तमाशा देखने की दोषी हैं। जिस तरह से कांग्रेसी नेताओं को बचाया जा रहा है, वह यह बताने के लिए काफी है लोकतंत्र में सारा सिस्टम ही नेताओं-अधिकारियों के ईर्द-गिर्द घूमता है। आज भारत में लोकतंत्र कहना बेमानी है।

अमृतसर ट्रेन हादसे को लेकर रेल राज्य मंत्री से लेकर डीआरएम सभी ने अपनी सफाई में कहा कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां पटरियां घुमावदार हैं, जिसके चलते लोको पायलट समय रहते पटरी पर खड़ी भीड़ को नहीं देख पाया। लेकिन शनिवार सुबह होते ही रेलवे हकीकत जमींदोज हो गई। रेलवे फाटक से आधा किमी. पहले व बाद तक रेल पटरी बिल्कुल सीधी है। वैसे भी लोको पायलट की नज़र सिक्स बाई सिक्स होती ही है। ट्रैक पर जमा लोगों को देख नहीं पाने का बयान औ रेल पटरी के घुमावदार की बात पूरी तरह से गलत है। देखने वाली बात है कि, ये नेता, मंत्री मौके पर जाकर क्या देखते हैं, जब उन्हें अधिकारियों की बातों को ही दोहराना होता है। आखिर ये सभी इन अधिकारियों से कौन सा लाभ उठाते हैं कि वे उन्हें बचाने में जुट जाते हैं।

आखिर शहर में रेलवे ट्रैक की जिम्मेदारी संभालने वाली आरपीएफ और उनकी सूचना तंत्र क्या कर रहा था? जिस प्रकार से रेलवे इस पूरे मामले से अपना पल्ला छुड़ा रहा है वह अफसोसनाक है।

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