ARSD COLLEGE : ‘रंगायन रंग’ में रंगे प्रतिभागी छात्रों का बेहतर अभिनय प्रतिभा प्रदर्शन

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आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज के विद्यार्थियों की नाट्य प्रस्तुती।

आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज (दिल्ली विवि) के रंगायन नाट्य समिति नाट्य कार्यशाला में छात्रों की शानदार प्रस्तुती

कॉलेज प्रिंसिपल ज्ञानतोष कुमार झा ने कहा, नाट्य-कला छात्रों में छुपी प्रतिभा को वहिर्मुखी बनाकर उनके व्यक्तित्व को निखारता है, जीवन में अनुशासन बोध भी कराता है

report edited by manoj @report4india/ New Delhi.

साहित्य, नाट्य-कला व लोक संस्कृति समाज का आइना होने के साथ ही समृद्ध विरासत का भी हिस्सा है। भारत जैसे प्राचीन व समृद्धशाली सभ्यता-संस्कृति वाले देश में तो यह विधा लोक-जीवन में प्राण की तरह रची-बसी हुई है और इसे समृद्धशाली व गतिमान बनाने का काम शिक्षण संस्थाओं को है। नाट्य-विधा परंपरा को जीवित रखने और इस क्षेत्र में विद्यार्थियों में रूचि उत्पन्न करने का काम आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) का ‘रंगायन नाट्य समिति’ सहज रूप से कर रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को ‘रंगायन’ के तहत नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें, अलग-अलग आठ वर्गों में प्रतिभा संपन्न 16 युगल कलाकारों (विद्यार्थियों) ने भाग लिया। निर्णायक मंडल के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मनोज तिवारी और मार्कण्डेय पाण्डेय ने विजेता छात्रों के नामों की घोषणा की।

विजेता छात्र पुरस्कृत किये गये।

नाट्य कार्यशाला में अभिनय को प्रत्येक युगल ग्रुप को पांच से सात मिनट का समय निर्धारित था। अभिनय की शुरुआत छात्र अक्षित व छात्रा गुंजन पृथी ने ‘डॉल’ विषय (टाइटल) पर बढ़िया प्रस्तुती दी। उसके बाद दीक्षा व रितजयी ने ‘जस्टिस’ विषय पर, कोनिका व माही ने ‘छद्म भक्ति’, ब्रह्मिष्ठा व युवराज ने ‘थरेपी’, खुशी व स्नेहा ने ‘द अदर साइड’, रोहित-कृतिका ने ‘कैद’, अयान-आयुष ने ‘पहचान’ और गुंजन शर्मा व वंशिका ने ‘राख’ विषय पर बढ़िया प्रदर्शन कर अपने साथी छात्रों व दर्शकों की वाहवाही बटोरी।

प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त छात्र कॉलेज प्राचार्य के हाथों प्रमाण-पत्र प्राप्त करते हुए।

प्रतियोगिता में अयान-आयुष ने प्रथम, दीक्षा-रितजयी द्वितीय, खुशी-स्नेहा तृतीय व अक्षित-गुंजन ने सान्तवा पुरस्कार प्राप्त किये। निर्णायक मंडल ने सभी प्रतिभागियों के ‘अभिनय कला’ की भूरि-भूरि प्रशंसा के साथ ही उनके बेहतर भविष्य की कामना भी की।

इस मौके पर प्राचार्य प्रो. ज्ञानतोष कुमार झा ने अपने संबोधन में कहा, जहां नाट्य-कला छात्रों के अंदर की प्रतिभा को वहिर्मुखी बना उनके व्यक्तित्व को निखारता है वहीं, जीवन में अनुशासन का बोध भी कराता है। उन्होंने कहा, रंगायन के साथ उनका विशेष लगाव है और वे चाहते हैं कि इस क्षेत्र में विद्यार्थियों को बेहतर माहौल व मौका मिले। रंगायन नाट्य समिति के संयोजक अजीत कुमार ने सभी प्रतिभागी छात्रों को अपनी विशेष शुभकामनाएं प्रेषित की।

रंगायन के सदस्य अमित कुमार द्विवेदी, अनिल कुमार कलोत्रा ने कार्यशाला के आयोजन में विशेष भूमिका का निर्वहन किया।