‘बैंक पैसा लुटाते रहे और मनमोहन सिंह कागजों पर कुंडली मारे बैठे रहे’

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raghuram-rajan2004 में जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनी, सबकी मौज हो गई। मनमोहन सरकार ने 2006 से 2008 के दौरान बेहिसाब पैसे लूटाए। ऐसे लोगों को भी कर्ज दिया जिन्हें कर्ज जरूरत नहीं थी। ऐसे लोगों को भी भरपूर कर्ज दी गई, जिन्होंने पहले का कर्जा कभी लौटाया नहीं।  

⇑ रघुराम राजन (पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर)

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्‍ली। बैंकों के 16 लाख करोड़ रुपए के एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) को लेकर कांग्रेस के काल में रिजर्व बैंक के गवर्नर रहेरघुराज राजन ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गंभीर आरेाप लगाया है। लोक लेखा समिति के सामने अपने लिखित बयान में रघुराम राजन ने कहा कि बैंक पैसा लुटाते रहे हैं बताने के बाद पीएम मनमोहन सिंह कागजों पर कुंडली मारे बैठे रहे।

राजन ने साफ कर दिया कि नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) की समस्या यूपीए के समय की गंभीर समस्या थी। राजन ने अपने बयानों से कांग्रेस नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम और कपिल सिब्बल के बयानों की हवा निकाल कर रख दी। एनपीए की समस्या यूपीए के कार्यकाल के बाद विकट हुई। रघुराम राजन के जवाब के बाद एनपीए की समस्‍या के लिए सीधे-सीधे यूपीए सरकार को जिम्‍मेदार माना गया है।

राजन ने कहा कि बैंकों के सामने सबसे ज्यादा बैड लोन ऐसे हैं, जिन्हें 2006 से 2008 के बीच आवंटित किया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह ऐसा समय था जब आर्थिक विकास दर बेहद अच्छी थी और बैंकों को अधिक से अधिक कर्ज देकर इस रफ्तार को बढ़ाने की जरूरत थी। लेकिन ऐसी स्थिति में बैंकों को कर्ज देने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि जिन कंपनियों को वे कर्ज दे रहे हैं, उनका स्वास्थ्य अच्छा है या नहीं। या फिर वे समय रहते कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में हैं भी या नहीं।

रघुराम राजन ने दावा किया कि जहां बैंकों ने इस दौरान नया कर्ज बांटने में लापरवाही बरती, वहीं ऐसे लोगों को कर्ज दिया, जिनका कर्ज नहीं लौटाने का इतिहास रहा है। इस काल में देश में गंदे तरीके से कर्ज देने की शुरुआत हुई।

राजन ने दावा किया कि इस दौर में कर्ज लेने वाले एक प्रमोटर ने उन्हें बताया कि बैंक ऐसे लोगों को भी कर्ज दे रहा था, जिन्हें कर्ज की जरूरत नहीं थी। बैंक ने महज कंपनी से यह बताने के लिए कहा कि उसे कितने रुपयों का कर्ज चाहिए और वह कर्ज उस कंपनी को दे दिया।

साफतौर यह सब राजनीतिक दबाव में और मंत्रियों-नेताओं  की सिफारिश पर पैसे की लूट हो रही थी।

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