पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने सेट की राजनीति, तृणमूल के हक में सिर्फ ‘उग्रता’

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Kolkata BJP public rally

…किसी भी प्रकार से सत्ता को बचाए रखने की नीति पर तृणमूल कांग्रेस उतर आई है। वह, पूरी तरह से वामपंथियों के रस्ते पर है। परंतु, यह राज्य में राजनीति में परिवर्तन का बड़ा संकेत है। भले ही विधानसभा में बीजेपी चौथे नंबर की पार्टी है परंतु, ममता के सामने वह डटकर खड़ी होने वाली पहली पार्टी बन गई है। अब, इतिहास से समझने की जिम्मेदारी ममता की है। एक दौर में तृणमूल वामपंथियों के सामने ऐसे ही खड़ी हुई थी।

कोलकाता में बीजेपी की रैली।Kolkata BJP public rally

मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया। 12 August 2018  

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे बीजेपी का जनाधार बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ममता बनर्जी की उग्रता हावी हो रही है। पंचायत चुनावों में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता लगातार हिंसा कर रहे हैं। झारखंड के नजदीकी जिलों में हजारों की संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल से भागकर शरण लिए हुए हैं। देवघर, रांची, धनबाद, बोकारो, रामगढ़ आदि इलाकों में रह रहे कार्शयकर्रताओं को देखा जा सकता है।

अब, किसी भी प्रकार से सत्ता को बचाए रखने की नीति पर तृणमूल कांग्रेस उतर आई है। वह, पूरी तरह से वामपंथियों के रस्ते पर है। परंतु, यह राज्य में राजनीति में परिवर्तन का बड़ा संकेत है। भले ही विधानसभा में बीजेपी चौथे नंबर की पार्टी है परंतु, ममता के सामने वह डटकर खड़ी होने वाली पहली पार्टी बन गई है। अब, इतिहास से समझने की जिम्मेदारी ममता की है। एक दौर में तृणमूल वामपंथियों के सामने ऐसे ही खड़ी हुई थी।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कोलकाता में मिशन 2019 की शुरुआत कर दी है। उन्होंने यहां चुनाव को अपनी राजनीतिक मसौदे सेट कर दिए हैं। अमित शाह ने रैली में एनआरसी के मुद्दे पर ममता बनर्जी को पूरी तरह घेरा। सवाल उठाया कि आखिर बांग्लादेशी घुसपैठियों से ममता दिखाने के पीछे असली वजह क्या है। साथ ही, उन्होंने ताल ठोंककर कहा कि एक-एक घुसपैठियों की पहचान करके ही दम लेंगे। बांग्लादेशी घुसपैठ का एक बड़ा मुद्दा हमेशा से बंगाल की जनता के सामने रहा है। दशकों से राज्य में सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे से बचने की कोशिश करते रहे हैं। पश्चिम बंगाल की जनता जानती है कि बीजेपी के सत्ता में आने का मतलब क्या है?

अमित शाह ने रैली में स्पष्ट किया कि जो शरणार्थी हिंदू-मुसलमान हैं, उनके मानवाधिकारों की रक्षा हमारी सरकार करेगी और उन्हें चिंता करने की जरूरत भी नहीं है। लेकिन घुसपैठियों को वे नहीं छोड़ेंगे। वास्तव में, बंगाल की जनता यही तो चाहती है, जिसे वोट बैंक के चक्कर में कभी वामपंथी नज़रंदाज करते थे और अब ममता बनर्जी कर रहीं हैं।

संभव है, इस रैली के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं पर अटैक और बढ़ जाए। ममता का गुस्सा और बढ़ जाए लेकिन लोकतंत्र कि ऐसे हालात बताते हैं कि ‘जिंदा कौम’ किसी हिंसा या अपराध से नहीं डरती। ममता को यह ध्यान रहे कि यदि राज्य में उनकी सत्ता है तो केंद्र में भी बीजेपी बैठी हुई है। यह भूल नहीं सकते कि आज बीजेपी देश के 21 राज्यों में शासन में है।

 

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