बीजेपी के चलते ही ‘अस्तित्व’ के संकट से जूझ रही बसपा!

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मायावती ने अपनी साक्षात मौत के उस दृश्य को इसलिए भुला दिया कि बीजेपी ने पिछले दो चुनावों में एक प्रकार से बसपा को मार ही दिया

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मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया।

नई दिल्ली। बीते चार साल में उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा और विधानसभा में सबसे अधिक नुकसान बसपा को हुआ। 2007 में 206 सीटें जीतकर सरकार बनाने वाली बसपा को बीजेपी ने जहां 2014 लोकसभा चुनाव में जीरो पर आउट कर दिया वहीं, 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में वह मात्र 19 सीट ही जीत पाई। बसपा की यह दुर्गति उसके स्थापना काल 1989 के समय जैसा हो गया है जब उसे 12 सीटें मिली थी। मायावती अपने राजनीतिक जीवन के सबसे विकट काल में जी रहीं हैं। ऐसे में फिलहाल मायावती के पास समाजवादी पार्टी के सहारे के अलावा और कोई ठौर नहीं दिखाई दिया। हालांकि, जो लोग यह सोच रहे हैं कि 2019 में बसपा केवल सपा के साथ जाएगी यह गलत भी हो सकता है। बसपा कांग्रेस के साथ भी गठबंधन कर सकती है।

गोरखपुर और फूलपुर चुनाव में बीजेपी की हार और सपा की जीत को जो राजनीतिक विश्लेषक ‘बसपा- सपा गठजोड़’ को जीत का मंत्र समझ रहे हैं, दरअसल वे जल्दबाज़ी में हैं। बीजेपी की लोकसभा में 73 सीटें और विस में 324 सीटें जीतने की ताकत केवल मायावती और अखिलेश की जाति समीकरण के विखराव के कारण नहीं था। उप्र में अगर मायावती और अखिलेश पिछड़ी जातियां का मतलब यादव और दलित का मतलब मायावती की जाति समझ रहे हैं, तो भी राजनीतिक रूप से गलत है। यह पक्के तौर पर समझ लें कि आम चुनाव व विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी न तो मुसलमानों ने वोट दिया और न ही यादवों ने।

दरअसल, गोरखपुर और फूलपुर सीट पर हार का कारण बीजेपी के अपने वोटरों के प्रति उदासीनता है। बेहद कम वोटिंग और सपा-बसपा के समर्थन के बावजूद बीजेपी ने ठीकठाक वोट प्राप्त किया। बीजेपी भला 37 फीसद और 47 फीसद वोटिंग के दम पर अपने एकजुट विरोधियों से नहीं लड़ सकती। बीजेपी की हार की असली वजह यही है। दरअसल, सोचना तो सपा-बसपा को चाहिए कि इतने कम मतदान में भी बीजेपी को इतने मत किसके मिले। तभी 2019 में बीजेपी से पार पा सकते हैं। जो लोग यह कह रहै है कि नोटबंद और जीएसी के प्रतिक्रयास्वरूप बीजेपी हारी है, वे गलत दलील दे रहे हैं। जब नोटबंदी विस चुनाव में ‘वजह’ नहीं बनी तो उसके एक साल बाद उपचुनाव में भला कैसे बन सकती है। बीजेपी हार का मंथन सपा-बसपा के जीत से ज्यादा बेहतर तरीके से करेगी। यह बात मायावती भी जानती है, तभी तो उन्होंने चंड़ीगढ़ में कहा कि हमें सतर्क होना चाहिए क्योंकि बीजेपी ज्यादा योजनाबद्ध तरीके से सामने आएगी।

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