बुलंदशहर में जुटे हैं 10 लाख मुस्लिम, अवैध स्लाटर हाउस में काटे गए पशु!   

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सुन्नी मुसलिम धर्म के प्रसार के लिए तबलीगी जमात का बुलंदशहर में कार्यक्रम चल रहा है। जिसमें मुसलिम धर्म के प्रसार और उसके तौर-तरीके को बताया जाता है। ग्रामीणों का आरोप कि लाखों लोगों के दावत के लिए मीट की व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अवैध स्लाटर हाउस में काटे गए पशु। ग्रामीणों की नाराजगी की यह बड़ी वजह।

बुलंदशहर में तबलीगी जमात में जुटे मुसलिम समुदाय के लोग।bulandshahar-tabligi-jamat

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो। 

नई दिल्ली/बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गौकशी को लेकर हुई हिंसा में कई बातें सामने आ रही है। जिले में दरियापुर-अढौली गांव में सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा धार्मिक आलमी तबलीगी इज्तिमा चल रहा है। इस धार्मिक जलसे में करीब 10 लाख मुसलमान शामिल हुए हैं। इस धार्मिक जलसे का उद्देश्य इस्लाम धर्म का प्रसार और उसके रिति-रिवाजों व खानपान से अपने धर्म के लोगों को अवगत कराना है। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में शामिल होने आए एक विशेष धर्म के लोगों के दावत के लिए क्षेत्र में अवैध स्लाटर हाउस में पशु काटे गए। शिकायत के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे आसपास के गांवों के हजार से अधिक ग्रामीण विरोध-प्रदर्शन करने पुलिस चौकी पहुंचे जहां बाद में बवाल मच गया।

तबलीगी जमात मुस्लिम समुदाय के लोगों का एक जलसा है, जो हर साल राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होता है, जिसे इज्तिमा कहते हैं. तबलीगी शब्द का मतलब धर्म का प्रचार है। सबसे पहला तबलीगी जमात मेवात में हुई थी। इसमें लोगों को दावत देकर उन्हें इस्लाम धर्म की जानकारी दी जाती है।

आजादी से पहले 1927 में तबलीगी इज्तिमा की शुरुआत उस वक्त हुई थी, जब देशभर में आर्य समाज की ओर से घर वापसी अभिया चलाया जा रहा था। जो लोग बीते काल में किसी कारणवश हिन्दू से इस्लाम धर्म कबूल किया था लेकिन फिर भी वे हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज मान रहे थे। आर्य समाज ने उन्हें दोबारा से हिंदू बनाने का शुद्धीकरण अभियान शुरू किया था। इसके विरोध में 1927 में मोहम्मद इलियास अल कांधलवी ने भारत में आलमी तबलीगी इज्तिमा के जरिए इस्लाम धर्म फैलाने का आंदोलन शुरू किया। इसमें उन्होंने मुसलमानों को अपने धर्म में बनाए रखने के लिए इस्लाम धर्म का प्रचार कर जानकारी दी और उन्हें इस्लाम का महत्व बताया।

 

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