मौसम संग बदला ‘सपाई राजनीतिक मिज़ाज़’, बढ़ी मुलायम की ‘मारक क्षमता’

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…वैसे लोग व नेता भी, जो कभी मुलायम की कमान से बाहर जाने की कल्पना नहीं कर सकते थे। पर …आज पार्टी पैदल है और मुलायम का कद सामने है। ऐसे में बड़ी संख्या में विधायक मुलायम की उपेक्षा नहीं कर सकते। इस बात का ख्याल अखिलेश को भी है। फिलहाल अखिलेश के पास पार्टी कमान है लेकिन वह कामयाब नहीं है। यही बदली हुई राजनीति का चमकदार दर्पण है, जिसमें बार-बार अखिलेश अपना और मुलायम का चेहरा देख रहे हैं।

पार्टी को लेकर पिता-पुत्र में फिर खिंची तलवारें, अखिलेश ने 28 तो मुलायम ने 29 को बुलाई विधायकों की बैठक

mulayam-akhilesh-01डॉ. मनोज कुमार तिवारी।

नई दिल्ली/लखनऊ/रिपोर्ट4इंडिया। उप्र में चुनाव खत्म होने और समाजवादी पार्टी में बने नए राजनीतिक समीकरण के बाद एकबार फिर से ‘लड़ाई’ सामने आ गई है। पार्टी की करारी हार के बाद अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के बीच मतभेद की खबरें दोबारा से सामने आ रही हैं।  पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने 28 मार्च को जहां पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई है वहीं, मुलायम सिंह ने 29 मार्च को बुलाई है। इससे पिता-पत्र के बीच राजनीतिक मतभेद एकबार फिर से सामने आ रहे हैं लेकिन हालात बदले हुए हैं।
बताया जाता है कि मुलायम सिंह की तरफ से 29 मार्च को बुलाई गई बैठक में विधानसभा में विधायक दल के नेता को लेकर चर्चा हो सकती है। कहा जा रहा है कि मुलायम विधायकों को डिनर भी देंगे। इसी बीच, 28 मार्च से विस में विधायकों का शपथ ग्रहण शुरू हो रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद 16 मार्च को अखिलेश ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से भेंट की थी और 25 मार्च को सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। हालांकि, बैठक में मुलायम और शिवपाल मौजूद नहीं थे। बैठक में शिवपाल का नाम तक नहीं लिया गया। लेकिन शवपाल फिलहाल की पार्टी की स्थिति से बेहद प्रसन्न हैं और उनके लिए बड़ा मौका है। चित भी और पट भी दोनों शिवपाल के पक्ष में है। घर और बाहर दोनों की स्थितियां शिवपाल के अनुरूप है।
29 मार्च को मुलायम के बुलाए बैठक के बड़े राजनीतिक मायने हैं। चुनाव से पहले सपा विधायकों और चुनाव लड़ने को आतूर उम्मीदवारों को यकीन था कि अखिलेश की जीत निश्चित है। इसलिए उन्होंने मुलायम को छोड़ने में जरा देर न की। अखिलेश के साथ शिद्दत से खड़े रहे। वैसे लोग व नेता भी, जो कभी मुलायम की कमान से बाहर जाने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। पर आज पार्टी पैदल है और मुलायम का कद सामने है। ऐसे में बड़ी संख्या में विधायक मुलायम की उपेक्षा नहीं कर सकते। इस बात का ख्याल अखिलेश को भी है। फिलहाल अखिलेश के पास पार्टी की कमान है लेकिन वह कामयाब नहीं है। यही बदली हुई राजनीति का चमकदार दर्पण है, जिसमें बार-बार अखिलेश अपना और मुलायम का चेहरा देख रहे हैं।

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