बढ़ी चीन की चिंता…कम हुई आबादी

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70 साल में पहली बार चीन की आबादी में कमी आई। चीनी विशेषज्ञों के लिए देश की धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था के लिए जनसांख्यिकी संकट चेतावनी में कहा गया कि अगर स्थिति यही रही तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था को चीन नहीं बल्कि भारत पीछे छोड़ेगा जिसके पास ज्यादा युवा आबादी है।  

रिपोर्ट4इंडिया इंटरनेशनल डेस्क/नई दिल्ली।

दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देश चीन के लिए अब उसकी आबादी में कमी ही उसके लिए घातक साबित हो रही है। एक जानकारी के मुताबिक पिछले 70 सालों में पहली बार चीन की आबादी घट गई है। चीनी विशेषज्ञों यह मामने लगे हैं कि चीन की धीमी पड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह जनसांख्यिकी संकट एक चेतावनी है। इसके लिए चीन ने करीब चार दशक से जनसंख्या नियंत्रण के लिए लागू ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ को जिम्मेदार बताया जा रहा है। हालांकि,  2016 में चीन ने बुजुर्ग आबादी और कम होते वर्कफोर्स को देखते हुए कपल्स को दो बच्चों की अनुमति दे दी थी

अमेरिकी आधारित एकेडमी यी फुक्सियान के अनुसार, 2018 में चीन में जन्म दर में प्रतिवर्ष 25 लाख की गिरावट आई है। चीन ने चाइल्ड पॉलिसी जुर्माने के जरिए लागू की थी लेकिन जबरन अबॉर्शन के मामलों की वजह से चीन की खूब आलोचना हुई। 1979 में चीन ने ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू की थी जिसके बाद चीन में बच्चों की जन्म दर में तेजी से गिरावट आई।

चीन के दो बच्चों की नीति लागू करने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक जन्म दर में बढ़ोतरी नहीं हुई। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि चीन की सरकार नियमों में और ढील देगी। चीन के शहरी और ग्रामीण आबादी का अध्ययन करने वाले यी फुक्सियान ने कहा, पिछला साल चीन की आबादी के लिए एक ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट रहा। यी ने आगाह किया कि घटती आबादी के इस ट्रेंड को अब शायद बदला ना जा सके, ऐसा इसलिए कि यहां बच्चा पैदा करने के लिए उपयुक्त उम्र की महिलाओं की संख्या में कमी आई है। दूसरी तरफ, शिक्षा, स्वास्थ्य और घर पर बढ़ते खर्च की वजह से कपल्स ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करना चाहते हैं।

70 साल में पहली बार घटी आबादी, बढ़ी चीन की चिंता

यी के मुताबिक, 2018 में कुल 1.15 करोड़ मौतें दर्ज की गईं और आबादी में 12 लाख की कमी आई है। 1949 में न्यू चाइना की स्थापना के बाद से पहली बार ऐसा हुआ है कि चीन की आबादी घटी है। बुजुर्ग आबादी की समस्या बढ़ी है और आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है।70 साल में पहली बार घटी आबादी, बढ़ी चीन की चिंता

यी ने सरकार से अनुरोध किया है कि टू चाइल्ड पॉलिसी को खत्म कर लोगों के बेडरूम से बाहर निकलें और मैटरनिटी लीव और पैरेंट्स के लिए टैक्स ब्रेक जैसे कदम उठाएं। यी ने कहा, अगर सरकार अभी भी हस्तक्षेप नहीं करती हैं तो चीन की बुजुर्ग आबादी की समस्या जापान से भी भयंकर हो जाएगी और जापान से भी ज्यादा आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

जैसे-जैसे चीन में बुजुर्ग लोगों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे लेबर फोर्स भी घटता जा रहा है। इससे देश की पेंशन और हेल्थ केयर सिस्टम पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है। हर एक बुजुर्ग शख्स के लिए 7 लोग काम कर रहे हैं और सोशल वेलफेयर सिस्टम में योगदान कर रहे हैं। यी ने कहा, 2030 तक यह आंकड़ा केवल 4 ही रह जाएगा। अगर यही स्थिति रही तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था को चीन नहीं बल्कि भारत पीछे छोड़ेगा जिसके पास ज्यादा युवा आबादी है।

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