शीर्ष कोर्ट में आखिरी दिन का ‘दीपक’

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chief-justice-deepak-mishraचीफ जस्टिस मिश्रा ने विदाई के भावुक माहौल में कहा, अभी मैं दिल से रिस्पांस कर रहा

मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा अपने 41 साल के न्यायिक गतिविधियों से आज देश के 45वें चीफ न्यायाधीश दीपक मिश्रा विरत हो रहे हैं। अपने 65 साल के जीवन में 41 साल तक न्यायिक गतिविधियों में बिताने वाले दीपक मिश्रा ने अपने तमाम फैसलों से देश व समाज को दिशा दी है। कई मामलों में उनके फैसले बेहद चर्चित रहे।

सोमवार को कोर्ट में अंतिम दिन होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे और करीब आधे घंटे तक रहकर दीपक मिश्रा ने कई अहम मामलों की सुनवाई की। इस दौरान, कोर्ट में वकील ने भावुकतावश उनके लिए जन्मदिन वाली गीत ‘तुम जीयो हजारों साल…’ गुनगुनाया तो प्रति उत्तर में दीपक मिश्रा ने कहा, मैं अभी दिल दिल से रिस्पॉन्स कर रहा हूं, परंतु, शाम को सोच कर ही प्रतिक्रिया दूंगा।’

दीपक मिश्रा के महत्वपूर्ण फैसले-

दिल्ली के निर्भया गैंगरेप के दोषियों की फांसी की सज़ा बरकरार

चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी वाली वेबसाइटों को बैन  

 2016 में सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान अनिवार्य, दर्शक सम्मान में खड़े रहेंगे हालांकि जब वे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने तो 9 जनवरी, 2018 को दिए फ़ैसले में सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई।

 एफआईआर की कॉपी 24 घंटों में वेबसाइट पर डालने के आदेश

7 सितंबर, 2016 को जस्टिस दीपक मिश्र और जस्टिस सी नगाप्पन की बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि एफ़आईआर की कॉपी 24 घंटों के अंदर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। जस्टिस दीपक मिश्र जब दिल्ली के चीफ़ जस्टिस थे तो 6 दिसंबर, 2010 को उन्होंने दिल्ली पुलिस को ऐसे आदेश दिए थे।

आपराधिक मानहानि की संवैधानिकता बरकरार

आपराधिक मानहानि के प्रावधानों की संवैधानिकता को बरकरार रखने का आदेश को जिस बेंच ने सुनाया, उसमें जस्टिस दीपक मिश्र शामिल थे। फ़ैसला सुब्रमण्यन स्वामी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल व अन्य बनाम यूनियन के केस में सुनाया। बेंच ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति का अधिकार असीमित नहीं है।

याकूब मेमन की फांसी बरकरार

साल 1993 के मुंबई धमाकों में दोषी ठहराए गए याकूब मेमन ने फांसी से ठीक पहले अपनी सज़ा पर रोक लगाने की याचिका डाली थी। इस मामले में 29 जुलाई 2013 की रात को अदालत खुली। सुनवाई करने वाले तीन जजों में जस्टिस मिश्र भी शामिल थे।

प्रमोशन में आरक्षण पर रोक लगाई

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार की प्रमोशन में आरक्षण की नीति पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले को बरकरार रखा।

केरल के सबरीमाला मंदिर के द्वार महिला श्रद्धालुओं के लिए खोलने के आदेश

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