प्रकृति के प्रति संपूर्ण समर्पण का पर्व छठपूजा, अस्तांचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य समर्पित 

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गुरुग्राम सहित देशभर में मनाया जा रहा पवित्र छठपूजा, ‘रथि-विरथी’ सब एक जैसे, परिवार-समाज व लोक-कल्याण की मंगलकामना

मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया। 

वैसे भी सूर्योपासना का जो वैदिक व लौकिक आचार-व्यवहार है वह, अन्य किसी भी पूजा-विधान से भिन्न और साधनापूर्ण है। पवित्रता और समर्पण का हाल यह है कि व्रतधारियों के आचार-व्यवहार में रंचमात्र भी व्यवधान की गुंजाइश नहीं। हालांकि, सनातन धर्म में जाने-अनजाने हर प्रकार की चूक पर क्षमायाचना से पूर्ण फल प्राप्ति की कामना है। परंतु, छठपूजा में अद्भुत समर्पण व पवित्रता का योग होता है, जिसे भलीभांति निबाह किया जाता है। इसीलिए यह सामूहिक साधना का त्यौहार भी है। बुधवार को देश व दुनियाभर में सायं डुबते सूर्य को प्रथम अर्घ्य समर्पित कर मंगलकामना की गई।

गुरुग्राम सहित दिल्ली-एनसीआर और देश के विभिन्न प्रदेशों में छठपूजा पर व्रतधारियों ने भगवान सूर्य को प्रथम अर्ध्य प्रदान किया। साइवर सिटी के रूप में प्रसिद्ध गुरुग्राम और आसपास करीब दो सौ स्थानों के अलावा हजारों व्रतधारियों ने अपने घरों की छतों, लॉनों आदि में भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।

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