GURUGRAM : यहां पूर्वांचलवासियों को नहीं मिलता न्याय, कैंडिल मार्च में शामिल होने का आह्वान

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गुरुग्राम में न्याय के लिए मुहिम।

राजेंद्रापार्क में पूर्वांचलवासी के पूरे परिवार की दर्दनाक हत्या मामले में पुलिस पर ढुलमुल रवैया अपनाने और स्थानीय नेताओं की चुप्पी से संदेह 

प्रद्युम्न हत्या केस में भी गठित एसआईटी ने मामले को दबाने का काम किया था। सीबीआई जांच की मांग कुचलने को लेकर स्थानीय नेताओं के दबाव में पत्रकारों पर लाठीचार्ज की दमनकारी घटना को लोग भूले नहीं।

रविवार 5 सितम्बर को शाम साढ़े चार बजे कमला नेहरू पार्क से जॉन हॉल सिविल लाइन तक कैंडिल मार्च

डॉ. मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो/ गुरुग्राम। 

औद्योगिक कामगारों से लेकर व्यवसायी, प्रोफेशनल्स, रेहड़ी-पटरी, आटो-रिक्शा चलाने वाले, छात्रों से अटा पड़ा आधुनिक गुरुग्राम शहर की करीब आधी आबादी दूसरे राज्यों के रहने वालों की है। उनमें भी पूर्वांचलवासियों की संख्या अच्छी-खासी है। परंतु, यहां सरकार व प्रशासन में हमेशा से बाहरी लोगों की सुनवाई व न्याय के प्रति एक उदासीनता  दिखाई देती रही है। यह स्थिति अब भी बनी हुई है, जबकि वर्तमान सरकार को बनाने में इस शहरी मतदाता की भूमिका बड़ी है।

पुलिस व स्थानीय भाजपा नेताओं के चुप्पी से पूर्वांचलवासियों को लग गया है कि प्रशासन शहर के राजेंद्रापार्क इलाके में बिहार के सीवान निवासी कृष्णकांत तिवारी, उनकी पत्नी और एक मासूम बच्ची सहित चार के हत्या का आरोपित रिटार्यड फौजी को कठोर सजा दिलाने के प्रति प्रशासन का रवैया संदेहास्पद होता जा रहा है। साथ ही, इस घटना के प्रति स्थानीय भाजपा सहित अन्य पार्टियों के नेताओं के मुंह से एक शब्द नहीं निकलने से भी पूर्वांचलवासियों में नाराजगी है।  खासकर, धारदार गड़ासे से दो महिला और एक सात साल की बच्ची पर कई वार कर उनकी नृशंस हत्या कर दी गई जबकि एक मासूम बच्ची को गहरे जख्म दिये गए परतुं बीजेपी की महिला जिलाध्यक्ष ने भी अपना मुंह नहीं खोला। पीड़ितों के साथ एक अदद हमदर्दी तक नहीं जताई गई। इससे पूर्वांचलवासियों में गहरा क्षोभ है।

इससे पूर्व रेयान स्कूल में प्रद्युम्न हत्या मामले में भी हत्यारोपी छात्र को गुरुग्राम पुलिस एसआईटी ने जिस प्रकार से बचाने का प्रयास किया था, वह दर्शाता है कि स्थानीय पुलिस-प्रशासन यहां रह रहे और इस शहर के आर्थिक-सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लाखों पूर्वांचलवासियों के प्रति उनका रवैया ठीक नहीं है। सभी को पता है कि हरियाणा सरकार ने बमुश्किल सुप्रीम कोर्ट व मीडिया के दबाव में प्रदयुम्न हत्या केस को सीबीआई को सौंपा था। इस मामले में भी पुलिस पर राजनीतिक दबाव का संदेह पूर्वांचलवासियों को है। इसलिए, पूर्वांचलवासियों ने सरकार व प्रशासन पर दबाब बनाने रणनीति बनाई है ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।

उधर, पूर्वांचल समाज से धर्मेंद्र मिश्रा, सत्येंद्र सिंह, बीएन लाल, विपिन जायसवाल, बीके मिश्रा, राजेश पटेल, रणधीर राय, प्रदीप कनौजिया, उपेंद्र राय, अटल बिहारी कुशवाहा, एडवोकेट ए.एस. मिश्रा, अनिल यादव, राहुल पाण्डेय, संत कुमार, अवधेश सिंह, राम बहादुर सिंह, सुभाषचंद्र दूबे, लोकेश शुक्ला, नन्हे शुक्ला, डॉ. जेपी कुशवाहा, छोटेलाल प्रधान, श्रीप्रकाश राय, राजेंद्र कुमार, अरूण सिंह, सोमप्रकाश, मनोहर, उपेंद्र कुमार यादव, राजेश ठाकुर, एडवोकेट रीना झा वत्स आदि ने समस्तपूर्वांचल समाज का आह्वान किया है कि वे बड़ी संख्या में कैंडिल मार्च में शामिल होकर अपनी एकता का प्रकटीकरण करें। मारे गए परिजन के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करें। साथ ही, हरियाणा की भाजपा सरकार व गुरुग्राम प्रशासन को कठोर संदेश दें कि पूर्वांचल समाज अन्याय के प्रति एकजुट है और न्याय प्राप्ति की इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने को कटिबद्ध भी है।

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