भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन : ठंडे समुद्र तट पर रिश्तों में नई गरमाहट

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महाबलीपुरम में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी।

चीनी राष्ट्रपति बोले, भारत के साथ भावनात्मक जुड़ाव, दोस्त की तरह मिले, बातचीत में रिश्तों में नई गरमाहट, अनौपचारिक रूप से आगे मिलते रहेंगे। भारत में स्वागत से अभिभूत हूं।

पीएम मोदी बोले, चीन के साथ भारत के मजबूत रिश्ते से वैश्विक शांति को बढ़ावा। यह वार्ता सहयोग को नई दिशा देगी। दोनों के बीच पनपे मतभेद को विवाद बनने नहीं देंगे, सुलझाने की होगी कोशिश

Dr. Manoj Kumar Tiwary/ Report4India/ New Delhi.

भारत-चीन के बीच तमिलनाडु के ऐतिहासिक नगर महाबलीपुरम के समुद्र किनारे प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग चली दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर सम्मलेन में दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्षों के बीच गज़ब की कमेस्ट्री देखी गई। वर्तमान में भारत जहां दुनिया में अपनी ताकत और स्थान को पाने के लिए बेचैन है वहीं, चीन अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड वार के नकारात्मक परिणामों से बाहर निकलने की कवायद में है। दोनों देशों के बीच कुल 6 घंटे तक बातचीत हुई। इस बातचीत के परिणामों के बारे में लाभ-हानि के बारे में आकलन तो कुछ दिनों या महीनों के बाद होगा परंतु दोनों नेताओं के लहज़े और अंदाज़ नए संकेत की ईशारा कर रहा है। वैसे भी, प्रधानमंत्री मोदी के साथ शी जिनपिंग की दोस्ती बहुत कुछ बताती व दिखाती है। डोकलाम की तल्खी का अंतिम परिणाम भी सामने रहा है।

इस अनौपचारिक बातचीत को लेकर भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि दोनों देशों के रिश्ते इस महामिलन से और प्रगाढ़ होंगे। आर्थिक मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे के साथ निवेश के लिए नए रास्ते तलाशेंगे। कैलाश मानसरोवर से लेकर जलवायु परिवर्तन से लेकर आतंकवाद पर भी दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बात हुई। एक बात साफ की गई कि इस मीटिंग में कश्मीर के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई। शी ने पीएम मोदी को अगले साल भारत-चीन दोस्ती के 70 साल के मौक पर चीन आने का निमंत्रण दिया।

हालांकि, जो बातें औपचारिक रूप से विदेश मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक की गई वह एक पहलु है जबकि, इस फॉर्मल मीटिंग में अन्य कई ऐसी बातें दोनों तरफ से अलग-अलग मुद्दों पर हुई है, जिनके बारे में घोषणा नहीं की जाती है परंतु भविष्य में परिणाम दिखता है।

महाबलीपुरम के कोवलम स्थित ताज फिशरमैन होटल के कोव रिसॉर्ट में अनौपचारिक मुलाकात में दुनिया को आधुनिक भारत के उद्भव की ताकत औपचारिक ऐलान से कहीं अधिक दिखी और इससे आगे बताने की जरूरत वैश्विक रणनीतिक कूटनीति में नहीं होती। लेकिन इतना जरूर है कि चीनी राष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर भारत के कंसर्न पर कुछ कहने की कोशिश की होगी। राष्ट्रपति शी के भारत पहुंचने से एक दिन पहले इमरान खान से मिलने के बाद भी अगर औपचारिक रूप से चीनी राष्ट्रपति और पीएम मोदी के बीच 6 घंटे की बातचीत में पाकिस्तान और कश्मीर का जिक्र तक नहीं हुआ पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के चीन दौरे के बारे में राष्ट्रपति शी ने पीएम मोदी को जानकारी दी। इसे निश्चित रूप से बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर देखा जा सकता है।

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