तीन सरकारी बैंकों के विलय से बैंकिग व्यवस्था पर होगा असर

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bank of baroda

विजया बैंक और देना बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय की मंजूरी के बाद जहां इन बैंकों के बैलेंस शीट पर असर पड़ेगा वहीं ग्राहकों पर प्रभाव पड़ेंगे।

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रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। पबल्कि सेक्टर के तीन बैंकों बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैक और देना बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय कर दिया गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले से इन बैंकों के ग्राहकों पर असर पड़ना लाजिमी है। बैंकों के इस विलय के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक वजूद में आ जाएगा। फिलहाल स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया पहला और प्राइवेट सेक्टर का बैंक आईसीआईसीआई दूसरे नंबर पर है।

इस विलय के पीछे सरकार का मकसद है कि भारतीय बैंक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनें। माना जा रहा है कि विलय के बाद इन बैंकों की संचालन क्षमता में सुधार होगा। साथ ही, परिचालन लागत में जहां कटौती आएगी वहीं नया बैंक मौजूदा कई प्रतिस्पर्धी बैंकों को भी मात दे सकेगा। यह योजना एक अप्रैल  2019 से अस्तित्व में आएगी।

सरकार के इस कदम का सबसे बड़ा फायदा देना बैंक को मिलने वाला है। देना बैंक फंसे कर्ज (एनपीए) के बोझ के कारण फिलहाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए) के दायरे में है। इसी वजह से इस बैंक पर कोई कर्ज देने को लेकर पाबंदी लगी हुई है। वहीं, इसका नुकसान बैंक ऑफ बड़ौदा को उठाना पड़ सकता है।

सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि ब्रांड पहचान को कायम रख विलय के बाद नाम बैंक ऑफ बड़ौदा ही होगा। इससे बैंक ऑफ बड़ौदा के पास कुल 9401 बैंक शाखाएं और कुल 13432 एटीएम हो जाएंगे।

बैंकों के विलय के बाद देना बैंक या विजया बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों की छंटनी के सवाल पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। उन्होंने कहा, इस विलय से इन बैंकों के कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और विलय के बाद कोई छंटनी भी नहीं होगी।”

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