EXIT POLL : विपक्ष को ‘सांप सूंघ’ गया, नायडू के ‘चक्कर’ पर लगाम

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देश की सभी न्यूज़ चैनलों के साथ सर्वे एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि केंद्र में अगली सरकार भी मोदी की ही होगी। एक्जिट पोल आने के बाद विपक्षी दलों में सन्नाटा छा गया है। चुनाव बाद ही आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू विपक्षी पार्टियों के प्रमुखों के घर जाकर राजनीतिक माहौल को विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे थे। परंतु एक्जिट पोल के नतीजों के बाद फिलहाल उनसे मिलने से सभी ने मना कर दिया है। अब, 23 मई के दिन एक्चुअल रिजल्ट के बाद ही विपक्ष कोइ संकेत देगा।

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के एक्जिट पोल जारी होने के बाद से ही देश में राजनीतिक सरगर्मी बढञ गई है। खासकर, विपक्षी पार्टियों द्वारा सत्ता-समीकरण को लेकर की जा रही कोशिश को फिलहाल लगाम लगता दिख रहा है। देश के सभी सर्वे एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि एनडीए बहुमत के साथ दोबारा केंद्र में सरकार बनाने जा रही है। सभी सर्वे यह संकेत दे रहे हैं कि एनडीए कांग्रेस लीड यूपीए से कोसों आगे है। एक्जिट पोल में तीसरा मोर्चा भी अस्तित्व विहीन दिखता है। ऐसे में, विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास कर रहे आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू का दौड़ भी फिलहाल थम गया है। 19 मई को नायडू दिल्ली और लखनऊ में राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों के प्रमुखों से मिले थे। आगे, उनका कई नेताओं से मिलने का कार्यक्रम था। परंतु, एक्जिट पोल के संकेत के बाद कइ नेताओं ने इस संबंध में अपने पत्ते खोलने से मना कर दिया है और बैठकों के दौर को भी टाल दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में महागठंबधन में शामिल मायावती (बसपा) को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। बसपा ने ही सबसे पहले बैठक को 23 मई के बाद रखने को कहा है। हालांकि, 19 मई को देर शाम तक मायावती और अखिलेश यादव में लंबी बातचीत हुई है। माना जा रहा है कि एक्जिट पोल में उप्र के नतीजों के संकेत को लेकर दोनों नेताओं ने आगे की राजनीतिक समीकरण को लेकर बातचीत की है। हालांकि, अखिलेश यादव का कांग्रेस पर निशाना कुछ और कहानी का संकेत है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कांग्रेस सहित कइ विपक्षी दलों के नेता कई मामलों में बुरे फंसे हुए हैं। इसीलिए वे, पहले अपने को बचने का काम करेंगे। मायावती विपक्षी दलों की कमजोर कड़ी दिख रहीं हैं। हालांकि, वे गाहे-बेगाहे कांग्रेस पर हमला करतीं हुईं दिखती रहीं हैं परंतु, सत्ता के सामने शरणागत होना उनकी राजनीतिक मजबूरी है। उनके नजदीकी रिटायर्ड अधिकारी नेतराम पर छापेमारी के बाद की कड़ी अब खुलनी है और मायावती को इसका भान है।

हालांकि, विपक्षी पार्टियां फिलहाल सीरे से एक्जिट पोल को खारिज़ कर 23 मई के इंतजार की बात कर रहीं हैं। परंतु, विपक्षी पार्टियों के इस रुख पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉफ्रेंस पार्टी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने तंज कसा है। उन्होंने नसीहत दी कि समय आ गया है, टेलिविजन बंद कर दिया जाए, क्योंकि सभी एक्जिट पोल के रुझान गलत नहीं हो सकते।

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Exit-poll- Loksabha Election 2019

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