फैक्ट चेक : आलोक वर्मा मामले में गलत बयानी कर रही कांग्रेस  

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rahul gandhi in ramleela maidan

सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद कांग्रेस ने एकबार फिर पीएम मोदी पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने जिन तथ्यों का हवाला दिया, वह गलत और भ्रम फैलाने वाला।

एक सवाल यह भी कि आखिर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के पीछे क्यों खड़ी है कांग्रेस  

rahul gandhi in ramleela maidan

मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को 2-1 के बहुमत से सलेक्ट कमेटी उन्हें पद से हटा दिया। इस मामले में तीन दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने आलोक वर्मा को शर्तों के साथ पद पर बहाल किया था। साथ ही, कोर्ट ने कहा था कि सीवीसी के रिपोर्ट के आधार पर आलोक वर्मा के खिलाफ जांच की जा सकती है। सलेक्ट कमेटी की बुधवार को भी बैठक हुई थी, जिसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि सरकार आलोक वर्मा को उनके पद से हटाने में लगी हुई है। वह भी इसलिए कि राफेल सौदे की जांच बचा जाए। आलोक वर्मा के पीछे खड़ी कांग्रेस का तर्क राफेल जांच है।

अब, जबकि आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटा दिया गया है तो बृहस्पतिवार रात कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने राहुल गांधी के आरोपों को दोबारा रखते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा और सवाल उठाए कि आखिर पीएम नरेंद्र मोदी आलोक वर्मा को हटाने की जल्दी में क्यों थे?

इस दौरान आनंद शर्मा ने कहा कि सीवीसी ने आलोक वर्मा पर जो आरोप लगाए थे उनमें कोई सत्यता नहीं पाई गई। 6 आरोप गलत पाए गए, 4 आरोप निराधार मिले। 77 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बहाल किया था, आखिर क्या जल्दी थी कि उन्हें 24 घंटे के अंदर ही पद से हटा दिया गया।

आलोक वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा था-

-सीबीआई निदेशक को हटाने के मामले में वहीं नियम का पालन होना चाहिए जो सलेक्ट कमेटी देती है। उन्हें नियमानुसार नहीं हटाया गया।

-नियमों के आधार पर सीबीआई जैसी संस्था के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शर्तों के साथ पद बहाल किया।

– निदेशक पद पर रहते आलोक वर्मा कोई भी नीतिगत फैसला नहीं ले सकते। नया केस शुरू करने का भी उन्हें अधिकार नहीं।

-आलोक वर्मा पर लगे आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, की सरकार आरोपों की जांच करा सकती है। दोषी होने पर आलेक वर्मा रिटायर होने के बाद भी दंड भुगतेंगे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों के मामले में कागजात देखेने के बाद सीवीसी से कहा कि मामले में और जांच की जरूरत है।

सरकार ने क्या किया-

-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सलेक्ट कमेटी की बैठक बुलाई। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए जज और लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए। खड़गे ने आलोक वर्मा के पक्ष में वोट दिया जबकि सुपरीम कोर्ट के जज और पीएम ने आलोक वर्मा के खिलाफ हटाने के पक्ष में वोट दिया।

कांग्रेस के उठाए गए सवालों पर संदेह

-क्या सुप्रीम कोर्ट के जज और पीएम मोदी ने आलोक वर्मा हटाए जाने के लिए जो आरोप सामने थे, उसपर गौर नहीं किया। केवल मल्लिकार्जु खड़गे ने ही गौर किया कि सीवीसी द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं है। फिर कैसे और कहां से आनंद शर्मा आंकड़े पेश कर रहे हैं कि 6 आरोप गलत और 4 आरोप निराधार मिले। पहले भी सुप्रीम कोर्ट कह चुकी है कि सीबीआई के निदेशक को पाक-साफ होना चाहिए।

-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आलोक वर्मा निदेशक पद भी कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे और कोई नया केस भी नहीं सुन सकते। तो फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कैसे कह रहे हैं राफेल जांच की डर से पीएम मोदी जल्दीबाजी में आलोक वर्मा को हटा रहे हैं। वैसे भी आलोक वर्मा 15 जनवरी को रिटायर हो रहे थे और नियमों के मुताबिक 31 जनवरी को वे पद से हट जाते। जब आलोक वर्मा पर इतनी वंदिशें हैं कि वह कोई नया केस ही नहीं ले सकते तो फिर पीएम मोदी को उनसे क्या डर होता? राफेल केस में तो राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला तक मानने को तैयार नहीं हैं।

आलोक वर्मा के पीछे इसलिए है कांग्रेस-

-कांग्रेस के नेता-वकील, बीजेपी विरोध और वामपंथी माइंडसेट वकील जो कश्मीर को लेकर देश विरोधी बयान देने में नहीं हिचकते प्रशांत भूषण राफेल केस के बारे एक आवेदन बनाते हैं और सीबीआई निदेशक के कमरे में जाकर उन्हें सौंपते हैं। सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा आवेदन प्राप्त करते हैं। जबकि सीबीआई के निदेशक को ऐसा नहीं करना चाहिए। क्या सीबीआई के पास कोई आवेदन लेकर जाता है तो सीबीआई उसपर जांच शुरू कर देती है।

अगर ऐसा नियम होता तो राज्यों में तमाम ऐसे लोग जो सीबीआई जांच के लिए सरकार और कोर्ट का चक्कर काटने की बजाए सीधे सीबीआई के पास पहुंच जाते और आवेदन देकर जांच शुरू करा देते। सीबीआई जांच राज्यों की सिफारिश पर गृहमंत्री की संस्तुती के बाद या फिर कोर्ट के आदेश पर कोई जांच शुरू करती है। कांग्रेस पार्टी और राहुल किस तरह से बचकानी हरकत कर रहे हैं जब वे कहते हैं सीबीआई राफेल केस की जांच करने वाली थी। बिना सरकार या कोर्ट क आदेश सीबीआई कैसे कोई जांच शुरू कर सकती है?

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