‘झूठे मनमोहन! ‘पैसे पेड़ पर नहीं उगते’ बोल 1.3 लाख करोड़ का तेल कर्ज उधार छोड़ दिया’  

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तेल के दामों पर कांग्रेस के बंद और बोली पर बीजेपी ने तगड़ा जवाब दिया है। बंद की राजनीति में सामिल हो धरने पर बैठे मनमोहन को लेकर कहा कि उनके राज के पापों को बीजेपी सरकार ने धोया। कांग्रेस के राज में तेल की कीमतों पर दाम कम नहीं होंगे, पैसे पेड़ पर नहीं उगते जैसे बयान देने वाले तत्कालीन कांग्रेसी पीएम मनमोहन सिंह ने एक लाख तीस हजार करोड़ का कर्ज देश की जनता के सिर पर छोड़ दिया था, जिसे मोदी सरकार ने उतारा   

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नई दिल्ली। तेल कीकीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस के भारत बंद और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर बीजेपी ने बेहद पलटवार किया है। जनता के सामने मनमोहन सिंह के कथनी व करनी में फर्क को सामने रखते हुए बीजेपी ने कहा कि खुद के समय में कम नहीं होंगे तेल के दाम कहते हुए कहा था कि पैसे पेड़ पर नहीं लगते। आज वहीं व्यक्ति तेल की कीमतों को लेकर घरने पर बैठ रहा है।

बीजेपी ने मनमोहन सरकार के कच्च-चिट्ठा को सामने रखते हुए कहा कि मनमोहन सरकार ने तेल कंपनियों को एक लाख तीस हजार करोड़ रुपए का आयल बॉन्ड जारी किया था लेकिन उन्होंने अपने राज में चुकाया नहीं। एक लाख तीस हजार करोड़ रुपए की उधारी करने वाले  मनमोहन आज रामलीला मैदान में इसी मुद्दा पर भला कैसे अपनी चेहरा दिखा रहे हैं। उनके इस भारी-भरकम उधारी को मोदी सरकार ने चुकाया दिया। एक लाख तीस हजार करोड़ में 40 हजार करोड़ रुपए ब्याज के हैं। अगर यह भारी-भरकम कर्ज नहीं चुकाया जाता तो देश के नागरिकों पर लगातार यह बोझ बढ़ता जाता। ऐसा नहीं है कि कर्ज चुकाए बिना से देश के लोगों राहत मिल जाती। बल्कि उसके लिए सेस और कई प्रकार के अन्य टैक्स लगाना ही पड़ता। लेकिन मोदी सरकार ने इस कर्जे को उतारकर देश के नागरिकों के सिर से बोझ खत्म किया, जिसे मनमोहन सिंह ने डाला था।

बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह की पूरे अर्थशास्त्र की पढ़ाई पर पानी फेर दिया। बीजेपी ने कहा है कि मनमोहन सिंह तो खुद कहते थे कि ‘पैसे पेड़ पर नहीं उगते’ और इसके बावजूद उन्होंने 1.3 लाख करोड़ रुपये का ऑयल बांड बिना चुकाए छोड़ दिया। मनमोहन सिंह ने पेट्रोलियम उत्पादों पर जनता को सब्सिडी देने के लिए ऑयल बांड के जरिए बाजार से कर्ज लिया था।

बीजेपी ने कहा कि मोदी सरकार ने बकाया ऑयल बॉन्ड ब्याज के साथ चुकाया है। मोदी सरकार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि ‘हम नहीं चाहते थे कि ये बोझ हमारे बच्चों पर पड़े।’

बीजेपी ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करतेहुए मनमोहन सिंह के दो पुराने बयानों का उल्लेख भी किया। मनमोहन सिंह ने 2008 में कहा था, ‘ऑयल बांड जारी करना और तेल कंपनियों पर घाटे का बोझ डालना, इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। ऐसा करके हम केवल अपना बोझ अपने बच्चों पर पास कर रहे हैं, जिन्हें ये कर्ज चुकाना पड़ेगा।’ बीजेपी ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के चलते अब बच्चों पर कोई बोझ नहीं डाला जा रहा है। इतना ही नहीं, मनमोहन सरकार ने जो बोझ भविष्य की पीढ़ी पर डाला था, वो भी मोदी सरकार ने चुका दिया है। इसलिए आज मनमोहन सिंह की आपत्ति समझ से परे है।

बीजेपी ने यह भी कहा कि यूपीए के मुकाबले एनडीए सरकार में कीमतों में बढ़ोतरी काफी कम हुई है। 2004 से 2009 के बीच डीजल की कीमतों में 42 प्रतिशत और 2009 से 2014 के बीच 83.7 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। इसके मुकाबले मोदी सरकार में 2014 से 18 सितंबर 2018 तक ये बढ़ोतरी सिर्फ 28 प्रतिशत ही हुई है।

इस तरह पेट्रोल की कीमतों में भी कांग्रेस सरकार के दौरान ज्यादा इजाफा हुआ। 2004 से 2009 के बीच पेट्रोल के दाम 20.5 प्रतिशत बढ़े, जबकि 2009 से 2014 के बीच ये वृद्धि 75.8 प्रतिशत रही। इसके विपरीत मोदी सरकार में अभी तक सिर्फ 13 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।

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