कब तक चलता रहेगा राष्ट्रीय राजधानी के बीच JNU का देशद्रोही एजेंडा?

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सुकमा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने पर प्रोफेसर की गाड़ी का शीशा तोड़ा, घर पर भी किया हमला, वामपंथी संगठनों पर आरोप  

buddh-singh-jnu-01नई दिल्ली/रिपोर्ट4इंडिया। राष्ट्रीय राजधानी के बीच में देश के पहले प्रधानमंत्री के नाम पर बना जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में देशद्रोही हरकतें रूकने का नाम नहीं ले रही है। लोगों के सामने बड़ा सवाल है कि आकिर राजधानी के बीच में देशद्रोह का यह गढ़ कैसे गंदी हरकतें कर रहा है? इस विवि में कौन वे लोग है जो नक्सलियों, कश्मीरी आतंकियों और पाकिस्तानियों के समर्थन में खड़े हो रहे हैं और आखिर इनका समूल नाश करने के लिए दिल्ली की जनता को क्या करना होगा? पिछली बार जब सुकमा में 72 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए तो जेएनयू में जमकर जश्म मनाया गया। तब चुकि, केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब जेएनयू के वामपंथी देशद्रोहियों को सरकार की तनिक भी डर नहीं थी। इसलिए उन्होंने खुलकर जश्न मनाया था। आज सरकार के डर के चलते वे 25 जवामों के मारे जाने पर जश्न तो नहीं मना सके पर कैंपस में इन शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने वाले प्रोफेसर के कार व घऱ की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए।
जेएनयू में कंप्यूटर साइंस के शिक्षक डॉ.बुद्ध सिंह की गाड़ी का शीशा तोड़ दिया। डॉ. बुद्ध सिंह का कहना है, हमने साबरमती लॉन में सुकमा और कुपवाड़ा में शहीद हुए जवानों को नमन करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया था, उसका मुझे इनाम मिला है। इस कैंपस में पहली बार जवानों की शहादत को सलाम करने के लिए कार्यक्रम का अयोजन किया गया था, लेकिन वामपंथी देशद्रोहियों को यह रास नहीं आया।
बुद्ध सिंह ने कहा, मैंने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही, जेएनयू प्रशासन से इस घटना की जांच कराने की मांग की है। इस घटना के बाद से मेरा परिवार डरा हुआ है।
इस मामले में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व संयुक्त सचिव और एबीवीपी के नेता सौरभ शर्मा का कहना है कि कैंपस में पत्थरबाजी का काम वामपंथियों के अलावा कोई और नहीं कर सकता। वहीं, जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मोहित पांडेय का कहना है कि डॉ. बुद्ध सिंह सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

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