हार्ट के लिए नुकसानदेह थायराइड का बढ़ना

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दिल की बीमारी के अन्य कई कारणों में से एक प्रमुख कारण थायराइड ग्रंथि का डिसऑर्डर होना भी है। इस बारे में अपने डॉक्टरों से जरूरी सलाह लें

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रिपोर्ट4इंडिया डेस्क।

वर्तमान में विश्व में मौत का बड़ा कारण ह्रदयाघात या हृदय संबंधी रोग है| आधुनिक जीवन-शैली में अनियमितता ही हार्ट अटैक या हृदयाघात का कारण है। हृदय में ब्लॉकेज के कारण होने वाली इस बीमारी से दुनिया भर में कई लोग पीड़ित हैं और कई जान गंवा चुके हैं। हार्ट अटैक के पचास प्रतिशत मरीजों की अस्पताल पहुँचने से पहले ही मृत्यु हो जाती है। हर साल भारत में 30 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारी से होती है। चिकित्सा विज्ञान में हुई इतनी प्रगति के बाद भी दुनिया में हार्ट अटैक और स्ट्रोक मौत की बड़ी वजह बनी हुई है। इसलिए इन रोगों की और वजहों की पहचान बड़ी उपलब्धि है। दिल की बीमारी के कई कारण हो सकते है| समय के साथ कोरोनरी आर्टरी की दीवारों पर चिकनाई जमती रहती है। कैलशियम और अन्य तत्व भी उस चिकनाई में जमा होते रहते हैं, उस जमाव को पलाक कहते हैं। पलाक के कारण कोरोनरी आर्टरी का अंदर का व्यास कम हो जाता है, इस कारण दिल के विभिन्न भागों को खून कम मिलता है और दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है।

दिल की बीमारी के कई कारणों में से एक प्रमुख कारण थायराइड ग्रंथि का डिसऑर्डर होना है| थायराइड ग्रंथि के डिसऑर्डर होने से शरीर के लिए अतिआवश्यक T-3 और T-4 हार्मोंस असंतुलित हो जाते है| इनका उत्पादन या तो आवश्यकता से कम हो जाता है या फिर ज्यादा| दोनों ही परिस्थितियों में ये शरीर के लिए घातक है| इससे शरीर के लिए आवश्यक मेटाबोलिज्म प्रभावित होता है| इससे शरीर में कोशिकाओं को प्रयाप्त उर्जा नहीं मिल पाती| थायराइड की दोनों प्रकार की समस्याओं में दिल की धड़कन प्रभावित होती है| हाइपोथायराइडिज्म में दिल की धडकन मंद हो जाती है तो हाइपरथायराइडिज्म में दिल की धड़कन बढ़ जाती है| कभी-कभी तो पीड़ित को स्वास लेने में कठिनाई का अनुभव होता है| थायराइड हार्मोन का उच्च स्तर दिल की अच्छी सेहत के लिए खतरनाक है। इसके चलते हृदय रोग की चपेट में जाने के साथ ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

एक नए शोध में थायराइड के मरीजों को हृदयघात के प्रति आगाह किया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, एथ्रोस्क्लेरोसिस के चलते धीरे-धीरे हृदय की धमनियां सख्त और संकरी होती जाती हैं। इसके चलते खून का प्रवाह अवरुद्ध होने लगता है। इससे हृदय रोग का खतरा बढ़ने लगता है। नीदरलैंड के शोधकर्ता अर्जोला बानोन के अनुसार दुनिया में हार्ट अटैक और स्ट्रोक तमाम रोकथाम और उपचार के बावजूद मौत की बड़ी वजह बनी हुई है। इसलिए इन रोगों की और वजहों की पहचान बड़ी उपलब्धि है। नए शोध में पाया गया है कि मेटाबोलिज्म के नियंत्रण के लिए थायराइड ग्रंथि से होने वाले फ्री थायरोक्सिन (एफ-टी-4) का उच्च स्तर पर स्राव से रोगियों में हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। थायराइड हार्मोन की निगरानी से इस बीमारी के खतरे के रोकथाम में मदद मिल सकती है।

सामान्यत: हार्ट अटैक के लक्षण आधे घंटे तक या इससे ज्यादा समय तक रहते हैं और आराम करने या दवा खाने से आराम नहीं मिलता। लक्षणों की शुरुआत मामूली दर्द से होकर गंभीर दर्द तक पहुंच सकती है। कुछ लोगों में हार्ट अटैक का कोई लक्षण सामने नहीं आता, जिसे हम साइलेंट मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन यानी एमआई कहते हैं। ऐसा आमतौर पर उन मरीजों में होता है जो डायबीटीज से पीडि़त होते हैं। जिन लोगों को हार्ट अटैक की आशंका है, वे बिल्कुल देर न करें। फौरन आपातकालीन मदद लें, क्योंकि हार्ट अटैक में फौरन इलाज बेहद जरूरी है। इलाज जितनी जल्दी होगा, मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। सीने, बाहों, कुहनी या छाती की हड्डियों में असहजता, दबाव, भारीपन या दर्द का अहसास आदि हार्ट अटैक के लक्षण है। लम्बे समय तक पेट भरा होने जैसा लगना, अपच या हार्टबर्न का अहसास होना, पसीना, उल्टी, मितली या कमजोरी महसूस होना भी ह्रदय की समस्या की तरफ संकेत करते है। बहुत ज्यादा कमजोरी, घबराहट या सांस का रुक-रुककर आना, दिल की धड़कनों का तेज या अनियमित होना भी प्राय: ह्रदय की समस्या को दर्शाते है|

अगर आपको कोई ऐसा लक्षण महसूस होता हो तो देर ना करे| तुरंत अपने डॉक्टर को फोन करके सहायता मांगे| इसके अतिरिक्त आप अपनी जीवन-शैली में परिवर्तन करके भी ह्रदय की समस्या से दूर रह सकते है| इसके लिए सर्वप्रथम आपको अपने आहार की आदतों में बदलाव लाना होगा| संतुलित एवं स्वस्थ्य भोजन की आदत डालनी होगी| जंक फ़ूड, फ़ास्ट फ़ूड एवं डिब्बा-बंद खाद्य-पदार्थों से परहेज करना चाहिए| अधिक वसा युक्त आहार का प्रयोग भूल कर ना करे| ओमेगा-3 का सप्लीमेंट ले या ऐसा आहार ले जिसमे ओमेगा-3 प्रचुर मात्रा में पाया जाता हो| इसके साथ ही क्रिया शील रहे| रोज प्रात: थोडा टहलने की आदत डाले| योगाभ्यास करे| इसके साथ ही अपने थायराइड के लेवल को नियंत्रण में रखे| अगर थायराइड के साथ डायबिटीज की भी समस्या हो तो रिस्क के चांस और भी बढ़ जाते है| ऐसे लोगो को विशेष सावधानी की जरुरत होती है| ऐसे लोगो को थायराइड के लेवल के साथ ही साथ डायबिटीज के लेवल को भी नियंत्रण में रखना चाहिए| याद रखे- इलाज से बेहतर सावधानियां होती है| इसलिए सावधान रहे, किसी भी असामान्य लक्षण को अनदेखा ना करे|

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