भारतीय तत्त्वज्ञान में मनुष्य ही ‘ब्रह्म’

0
128
brahma-01

brahma-01

हृदयनारायण दीक्षित।

प्रस्तुती-रिपोर्ट4इंडिया।

श्रीमद्भागवद्गीता में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, “मैं ज्ञान व ज्ञेय जानने का इच्छुक हूं -इच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च। श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया “आत्म साक्षात् का नित्य तत्व व तत्व के अर्थ का दर्शन ही ज्ञान है। अन्य कुछ नहीं।” यहां सदा रहने वाले को नित्य तत्व कहा गया है। इसी तत्व के अर्थ दर्शन को ज्ञान कहा गया है “नित्य तत्वं तत्वज्ञानार्थ दर्शनम्। यही जानने योग्य है इसलिए ज्ञेय है।  “यह ब्रह्म अनादि है। इसके हाथ, पैर, सिर, मुख और कान सर्वत्र है। यह सबमें है।” यहां ब्रह्म की जगह पुरूष रख सकते हैं।
ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में समूची सृष्टि को एक ‘विराट् पुरूष’ के रूप में देखा गया है। इसके सहस्त्रों सिर और पैर हैं। ब्रह्म की तरह यह पुरूष भी सदा से है। जो अब तक हो गया और जो आगे होगा वह सब पुरूष ही है। ऋग्वेद में ऐसे ही एक देवता अदिति हैं। उनका विस्तार भी ऐसा ही है।
मुण्डकोपनिषद् में इसका नाम अक्षर ब्रह्म है, “अक्षर ब्रह्म से विश्व उत्पन्न हुआ है। इससे अन्न प्राण मन पैदा होते हैं।”
brahmandअस्तित्व को एक जानने की अनुभूति ऋग्वेद से लेकर उपनिषद् और गीता में एक जैसी है। जैसे ऋग्वेद का पुरूष है वैसे ही गीता का विराट रूप। ऋग्वेद में पुरुष के मन से चन्द्रमा, नेत्रों से सूर्य प्रकट हुए। मुख से अग्नि और प्राण से वायु का अभ्युदय हुआ। (ऋ.10.90.13) इस तरह वायु और प्राण एक हुए। प्राण महत्वपूर्ण है। अथर्ववेद के 11वें काण्ड का चौथा सूक्त ‘प्राण’ को अर्पित है- “प्राणसर्वस्य ईश्वरः। प्राण ही जीवन है, प्राण ही मृत्यु। प्राण वर्षा कराते हैं। प्राण ही औषधियाँ देते हैं आदि। इसलिए सारे देवता प्राण के उपासक हैं।” यहाँ ऋषि अपने लिए भी प्राण आराधना करते हैं। प्राण स्तुत्य हैं। जैसे सृष्टि जटिल संरचना है वैसे ही मनुष्य जटिल संरचना है।
भारतीय तत्त्वज्ञान में मनुष्य वैसा ही है जैसे ब्रह्म है, जैसा पिण्ड वैसा ब्रह्माण्ड। प्रकृति में 5 तत्त्व हैं, मनुष्य में भी 5 तत्त्व हैं। मनुष्य मोटे तौर पर शरीर, मन, बुद्धि और प्राण आत्मा का समुच्चय है। लेकिन इन सबमें प्राण की महत्ता बड़ी है। जैविक ऊर्जा प्राण है। सारे पदार्थ ऊर्जा का संगठित रूप है। प्रश्नोपनिषद में कहा है ”तीनो लोकों में जो कुछ भी है, सब प्राण है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here