इंफोसिस संस्थापक नारायण मूर्ति ने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की

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देश व दुनिया के आईटी सेक्टर के नामी उद्योगपति ने कहा, वे पीएम पद पर फिर PM देखना चाहते हैं। पीएम मोदी के अनुशासन और जीएसटी समेत अहम नीतिगत फैसलों की जमकर तारीफ की 

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। भारतीय उद्योगजगत प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों और देश में आर्सथिक सुधारीकरण का प्रसंशक रहा है। पीएम मोदी के साढ़ चार के कार्यकाल पर नज़र डाते हुए आईटी सेक्टर के दिग्गज इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति ने प्रधानमंत्री मोदी को दोबारा इस पद पर देखना चाहते हैं। उन्पहोंने कहा, पीएम मोदी  मजबूत आर्थिक प्रगति वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।

 

एनआर नारायण मूर्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके अनुशासन और जीएसटी समेत अहम नीतिगत फैसलों को लेकर जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, वर्तमान सरकार की निरंतरता भारत के लिए अच्छी होगी, इससे इकोनॉमी को रफ्तार मिलेगी। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में भी मोदी सरकार कामयाब रही है। हमें आभारी होना चाहिए कि कम से कम पीएम मोदी एक ऐसे राष्ट्रीय नेता हैं, जो भारत में सुधार करने में रूचि रखते हैं।

मूर्ति ने कहा कि कुछ मामलों में कुछ खामियां नजर आई हैं, लेकिन हर चीज के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, ये नौकरशाही का काम है। ये पीएम मोदी का काम नहीं है कि वो हर गांव में जाएं और इसे साफ रखें। ये समस्या भारतीय मानसिकता के साथ है, हम उदासीन और गैर-अनुशासित हैं। हमें आर्थिक परिवर्तन पाने से पहले सांस्कृतिक परिवर्तन की तत्काल आवश्यकता है।

 

एक अंग्रेजी चैनल से बातचीत में नारायण मूर्ति ने कहा, पिछले 5 साल का कार्यकाल देखें तो मुझे लगता है कि देश में एक ऐसे नेता हैं जिनका फोकस अनुशासन, स्वच्छता और आर्थिक प्रगति पर केंद्रित है, जो कि एक अच्छी बात है। सरकार की निरंतरता देश के लिए अच्छी बात होगी। मूर्ति ने मोदी सरकार के दौरान इकोनॉमी के लिए किए गए रिफॉर्म्स की भी जमकर तारीफ की। मूर्ति ने कहा कि GST से देश की इकोनॉमी को तेजी मिली है।

जीएसटी या इन्सॉल्वेंसी बैंकरप्सी कोड लागू करने के तरीकों पर मूर्ति ने कहा कि कुछ मामलों में कुछ खामियां नजर आई हैं, लेकिन हर चीज के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, ये नौकरशाही का काम है। ये पीएम मोदी का काम नहीं है कि वो हर गांव में जाएं और इसे साफ रखें। ये समस्या भारतीय मानसिकता के साथ है, हम उदासीन और गैर-अनुशासित हैं। हमें आर्थिक परिवर्तन पाने से पहले सांस्कृतिक परिवर्तन की तत्काल आवश्यकता है।

 

 

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