कश्मीर : पत्थरबाजी-हिंसा की आड़ में सेना-पुलिस से हथियार लूट रहे उपद्रवी

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kashmir--burhan-prortest-04उपद्रवियों से सख्ती से निपटना जरूरी   

नई दिल्ली। एक आतंकी के समर्थन में कश्मीर में प्रदर्शनकारियों व उपद्रवियों के सामने आने से हालात दिनोंदिन खराब हो रहे हैं। सेना व पुलिसकर्मी के सख्ती से नहीं निपटने के परिणामस्वरूप प्रदर्शनिकारियों को आगे स्थानीय आतंकी हिंसा व हथियार लूट की वारदोतों को अंजाम दे रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के इस खुलासे से सरकार पशोपेश में है।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर की मानें तो, उपद्रवियों की एक भीड़ ने दो दिन पहले कुलगाम के दामहल हाजीं पोरा पुलिस स्टेशन पर धावा बोलकर करीब 70 सेमी-ऑटोमेटिक और ऑटोमेटिक हथियार छीन लिए। मंगलवार को भी दो अलग-अलग जगहों पर उपद्रवियों ने पुलिस से हथियार छीनने की कोशिश की।

सेना-पुलिस से हथियार लूट कर स्थानीय आतंकियों को दिया जा रहा

एक तरफ जहां पुलिस और सेना राज्य में हिंसा को रोक शांति स्थापना के प्रयास में जुटी हुई है, तो दूसरी तरफ उपद्रवियों और स्थानीय आतंकी मिलकर पुलिस और सेना के हथियार लूट आर्म्स बैंक बनाने में लगे हैं। खबर के अनुसार, त्राल में एक समूह ने चार कॉन्स्टेबलों पर हमला बोल कर उनसे हथियार छीनने की कोशिश की। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने ऐसा होने नहीं दिया। मंगलवार देर शाम करलपुरा पुलिस स्टेशन पर हमला किया गया। खबरों के मुताबिक हमलावरों का मकसद हथियार लूट लेना था।

अखबार के मुताबिक, सीआरपीएफ अधिकारी ने बताया कि सोमवार को दो सीआरपीएफ जवान एक नागरिक को अस्पताल ले जा रहे थे और इसी दौरान विद्रोहियों ने उन पर हमला किया। जवानों ने जवाबी कार्रवाई की तो विद्रोहियों ने पत्थर और रॉड से मारना शुरू कर दिया। लेकिन किसी भी तरह से जवानों ने उन्हें अपनी राइफल नहीं छीनने दी। इससे पहले शनिवार को भी बिजबेहेरा में पुलिस पोस्ट पर हमला कर कुछ हथियार लूटे गए थे।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश प्रदर्शनकारी हथियार लूट कर उसे स्थानीय आतंकियों तक पहुंचा रहे हैं और इसका इस्तेमाल सेना के खिलाफ हो रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मामना है कि कानून-व्यवस्था लागू कराने में किसी तरह ढील नहीं होनी चाहिए। विद्रोहियों-हमलावरों से सख्ती से निपटना जरूरी है। क्योंकि, कश्मीर का ट्रेंड ही आतंकी समूहों की मदद करना हो गया है।

 

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