जनरल कैटेगरी आरक्षण बिल के खिलाफ सक्रिय हुए वामपंथी ‘माइंडसेट’ NGO

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राज्यसभा से पास होने के साथ ही सामान्य वर्ग के गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के संविधान संशोधन बिल 2019 को खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया

बुधवार को सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसद आरक्षण पर राज्‍यसभा में भी मुहर लग गई।

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रिपोर्ट4इंडिया (एजेंसी इनपुट सहित)

नई दिल्ली। जनरल कैटेगरी के गरीबों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसद आरक्षण को वामपंथी विचारों से संबंद्ध एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस संबंध में दायर याचिका पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई निर्णय नहीं लिया है।

यूथ फॉर इक्वैलिटी नामक एक संस्था ने इस बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इसलिए इसे रद्द किया जाए। याचिका में कहा गया है कि आर्थिक आरक्षण का प्रावधान करने वाला संसद से पास बिल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फ़ैसले का उल्लंघन करता है। याचिका में इन्दिरा साहनी फ़ैसले का भी हवाला दिया गया है।

बुधवार को सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसद आरक्षण का 124वां संविधान संशोधन बिल 2019 पास हो गया है। अब इस बिल को राष्ट्रपति को मंजूरी देना है।

वामपंथी पार्टियां संसद में इस बिल के खिलाफ थीं और उसे सेलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग की थी।

गौरतलब है कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत किया गया है। इसीलिए इसे राज्यों की विधानसभा से पारित कराने की जरूरत नहीं होगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के सा थी ही 10 फीसद आरक्षण लागू हो जाएगी।

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