महाशिवरात्रि : मंगलमय शिव से मंगल वृत्तियों की तृप्ति

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इस बार महाशिवरात्रि का महायोग बन रहा है। सोमवार का दिन होने, धनिष्ठा नक्षत्र की युति, दिवा परिध योग के बाद शिवयोग से सर्वमंगलकारी महाशिवरात्रि पर देवाधिदेव महादेव से सर्वकल्याण को नकारातमकता का नाश कर शुभता व पवित्रता प्राप्त करें।

महामंत्र-  ‘ऊँ नम: शिवाय’ के साथ ‘ते हृदयँ शिवाभिः तर्पयामि’ का जाप करें

रिपोर्ट4इंडिया /धर्म-संस्कृति डेस्क।

सोमवार चार मार्च को देवाधिदेव महादेव की विधिविधान के साथ पूजन महाशिवरात्रि का महामंगल संयोग बन रहा है। फल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के साथ सोमवार का दिन के साथ श्रवण व धनिष्ठा नक्षत्र के महामिलन, दिवा परिघयोग और शुभ शिवयोग से इस वर्ष महाशिवरात्रि का खास योग सर्वमंगलकारी और कल्याणाकारी है।

4 मार्च को दौपहर बाद चार बजकर 11 मिनट पर चतुर्दशी शुरू होकर मंगलवार 5 मार्च को शाम 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इस काल-नक्षत्र में अर्धरात्रिव्यापिनी ग्राह्य होने से सोमवार 4 मार्च को ही महाशिवरात्रि का महायोग बन रहा है जो शुभकारी व मंगलकारी है।

सनातन धर्म में भगवान शिव रक्षक और विनाशक एक साथ माने गए हैं। सरलता के साथ गरल धारण करने वाले देवाधिदेव महादेव समस्त अमंगल, नकारातमकता व बुराइयों का नाश करने के साथ ही ब्रह्मांड में कल्याण और पवित्रता की स्थापना कर उसकी पूरी रक्षा करते हैं।

सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना का दिन है। परंतु, महाशिवरात्रि ऐसा शुभयोग है जब भगवान शिव की भक्ति व श्रद्धापूर्वक पूजन से मनुष्य का सर्वत्र कल्याण होता है। इसी दिन विधि-विधान से महादेवी पार्वती के साथ महादेव की पूजा का विधान है।

भगवान शिव को गंगा,  विभूति को यमुना और रुद्राक्ष को सरस्वती माना गया है। इन तीनों की संयुक्त पूजा सर्वमंगलकारी और समस्त पापों का नाश करने वाली है। इसलिए पूजा के समय महादेव के साथ इन तीनों की उपस्थिति जरूरी है। इससे महादेव प्रसन्न होते हैं।

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