बंगाल में बदल रही ममता और राजनीति!

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मुसलिम तुष्टिकरण व वोटबैंक की राजनीति करने वाली ममता बनर्जी आजकल सार्वजनिक रूप से मंदिरों में दिख रहीं है। बीजेपी ने कहा है कि वह अपनी वास्तविक छवि को नरम हिंदुत्व में छिपाना चाह रही हैं, जिससे राज्य में बीजेपी के पक्ष में बन रहे माहौल व प्रसार को रोका जा सके।  

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मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया।

कोलकाता। मुसलिम बाहुल्य जनसंख्या वाले राज्यों में से एक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक सिद्धांत मुस्लिम तुष्टिकरण का रहा है। वैसे तो बंगाल की राजनीति में चाहे कांग्रेस हो अथवा वाम पार्टियां सभी ने इसी फार्मुले  तहत शासन किया है। बाद में ममता बनर्जी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के साथ ही अपराधयुक्त प्रतिक्रियावादी तत्वों को अपनी तरफ लाकर वाम पार्टियों को सत्ता से बेदखल कर दिया। लेकिन, केंद्रीय शासन में बड़ी ताकत के साथ मोदी के नेतृत्व में लौटी बीजेपी ने राजनीति के सभी समीकरण बदल दिए। आज बीजेपी राज्यों में भी बड़ी शक्ति के रूप में उभरी है। सहयोगियों के साथ 19 राज्यों में परचम पहराने के बाद बीजेपी तेजी से उत्तर-पूर्व के राज्यों सहित पश्चिम बंगाल में अपने विस्तार को लेकर तेजी से आगे बढ़ रही है।
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वर्तमान में विधानसभा और संसद में भले ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी की भागीदारी नीचले स्तर पर है लेकिन वह राज्य में विपक्षी पार्टियों से अधिक सरकार विरोधी रूख के साथ काम कर रही है। बीजेपी को संघ के कार्यक्रमों से भी बड़ा लाभ मिल रहा है। अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी का बड़ा नेतृत्व भी खड़ा हो गया है जो सरकार के विरोध में हर जगह दिखाई दे रहा है।
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ट्रिपल तलाक की लड़ाई लड़ने वाली सायरा बानो ने बीजेपी का झंडा पकड़कर यह तय कर दिया है, राज्य की राजनीति में अभ बीजेपी बड़ा खिलाड़ी है। बीजेपी राज्य में काफी धैर्य व रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। मुकुल रॉय के बीजेपी ज्वाइन करने का बाद से ही तृणमूल समझ चुकी है कि परिवर्तन को बहुत लंबे समय तक नहीं टाला जा सकता। साथ ही, सर्व समाज़ में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को जो आलम है, वह ममता के किसी प्रमाणपत्र के मोहताज़ नहीं है। फिलहाल राज्य में सत्ता का संचालन कर रही ममता बनर्जी केंद्र सरकार के विरोध में रहकर राजनीतिक रूप से कोई बड़ी लड़ाई नहीं जीत सकती। वह यह भी कह सकने की स्थित में नहीं रहेगी कि केंद्र मदद नहीं कर रहा, क्योंकि जनता ममता के विरोध को ही देख रही है।
इसलिए, पश्चिम बंगाल में ममता अपनी राजनीतिक धारा में थोड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा व सरस्वती पूजा को नियंत्रित करने वाली ममता बनर्जी आजकल मंदिर जा रही हैं। चुकि, सार्वजनिक रूप से मंदिर जाने से परहेज़ का मॉडल ममता ने वामपंथियों की वोटबैंक नीति से लिया था। उससे एक कदम आगे जाते हुए चेहरा व अपना रूप तक बदल लिया। लेकिन अब यह परिवर्तन देश में बह रही राजनीतिक बयार के परिवर्तन से प्रभावित है। इसीलिए, अब प्रदेश बीजेपी इसे हिन्दू वोट बैंक में बिखराव पैदा करने के रूप में तृणमूल की चाल की एक चाल बता रही है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगा रहे हैं कि वह भाजपा के पक्ष में ‘हिंदू वोटों’ को इकट्ठा नहीं होने देने के मकसद से ‘नरम हिंदुत्व’ अपना रही हैं। दिलीप घोष ने कहा कि चुकि, तृणमूल मुस्लिम तुष्टीकरण करती है और राज्य के कई हिस्सों में इस पर प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। वे तो यह भी कह रहे हैं कि ममता का मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करना राहुल गांधी से लिया गया है।

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