पश्चिम बंगाल : रस्सी जली पर, …अइठन रह गई !

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ममता बनर्जी ने कहा, मुझे रोकने की हिम्मत किसी में नहीं, मौत से नहीं डरती। सात दिन का समय जिसे जाना जाए…।

रिपोर्ट4इंडिया/ पूर्वोत्तर पॉलिटिकल ब्यूरो।

नई दिल्‍ली। पश्चिम बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी की हालत रस्सी जल गई पर बल (अइठन) नहीं गया वाली हो गई है। ममता बनर्जी के लगातार बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य वह चुनावी नुकसान को मानने को तैयार नहीं हैं और अपनी सत्ता व रूतबे को अपनी अहम के साथ जोड़कर जनता के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहीं हैं। राज्य में राजनीतिक हत्याओं व हिंसा के बीचजारी डॉक्‍टरों की हड़ताल ने स्थिति को गंभीर से गंभीरतम बना दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उनकी प्रतिक्रिया उकसाने वाली है। ममता बनर्जी ने उत्‍तर 24 परगना में कहा, मैं मौत से नहीं, बल्कि मौत मुझसे डरती है। मुझे रोकने की हिम्मत किसी में नहीं है। अपनी पार्टी में उनके खिलाफ उठ रही आवाज पर वह कहती हैं, सात दिन का समय दे रहीं हूं, जिसे जाना है वह जाए, हमारी पार्टी पवित्र हो जाएगी।

ममता बनर्जी ने राजनीतिक तौर पर बंगाली अस्मिता के सवाल आगे रखने का प्रयास किया है कि और डॉक्टरों के हड़ताल को स्थानीय बनाम बाहरी बनाने की कोशिश में लग गईं हैं। डॉक्टरों की सुरक्षा व हड़ताल को समाप्त करने को लेकर कोई कदम उठाने की अपेक्षा वह लोकल व बाहरी डॉक्टरों में भेद करने की राजनीति पर चल पड़ी है। परंतु, देश भर के डॉक्टरों ने हड़ताली डॉक्टरों के समर्थन में खड़े होकर यह जता दिया है कि डॉक्टर डॉक्टर हैं और उनकी एक ही आवाज है।

ममता बनर्जी ने कहा, मैं बिहार, यूपी, पंजाब जाती हूं तो हिंदी में बात करती हूं, क्‍योंकि राष्ट्रीय भाषा हिंदी है लेकिन जब आप बंगाल आएं तो यहां आपको बांग्‍ला बोलनी पड़ेगी। हम बंगाल को गुजरात नहीं बनने देंगे। बंगाल में हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है। अल्पसंखयको के ऊपर हमला हो रहा है। बंगाल में गुंडागर्दी का कोई स्थान नहीं है। यानी, जो ममता बनर्जी कह रही हैं, उससे उनका बर्ताव ठीक उलट है। वह राज्य की मुख्यमंत्री है, कानून-व्यवस्था लागू करना उनका काम है परंतु, वह खुद हिंसा के प्रति आंखें बंद कर रखीं हैं।

सरकार में रहते हुए ममता अराजकता की भाषा बोल रहीं हैं। ऐसा तो देश में कोई विपक्षी दल भी नहीं करता। वह कहतीं हैं, बंगाल में रहकर बंगालियों को डराएंगे? मैं यह बर्दाश्त नहीं करूंगी। मुझसे क्यों इतना डरते हैं? हमारी लड़ाई गणतंत्र की लड़ाई है। पुलिस अगर काम नहीं करेगी तो जनता कहा जाएगी? लेकिन यह नहीं कहती कि पुलिस काम नहीं कर रही तो किसकी जिम्मेदारी है। पुलिस विभाग तो खुद ममता के जिम्मे हैं। बगांल से खबरे आतीं हैं कि पुलिस में भ्रष्टाचार किसके बल पर चलता है और माल खाने में कौन-कौन हिस्सेदार होते हैं।

 

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