सत्ता से बाहर आतंकी पैदा करेंगी महबूबा!

0
78
mehbooba-mufti

महबूबा की बंदर धुड़की से फर्क नहीं, जितने आतंकी सामने आएंगे मारे जाएंगे

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली/जम्मू। सत्ता से हटते ही महबूबा मुफ्ती धमकी देने लगी हैं। दरअसल, कश्मीर में राज करने वाली कश्मीरी पार्टियों का यह पुराना रवैया है। लेकिन, अब मौसम और राजनीति दोनों बदल चुकी है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की धमकी में खुद को बचाने की कोशिश छुपी हुई है। सत्ता से बेदखल होते ही पहले महबूबा दिल्ली में सपोर्ट के लिए कांग्रेस ‘माता’ सोनिया गांधी के दरबार में उपस्थित हुईं थीं। अब कह रहीं हैं कि पीडीपी को तोड़ने की कोशिश हुई कश्मीर में कई सैय्यद सलाउद्दीन पैदा होंगे और राज्य के हालत 90 के दशक जैसे हो जाएंगे।

हालांकि, सेना ने साफ किया है कि जो भी हथियार उठाएगा उसे मार गिराएंगे। केद्र ने भी साफ कर दिया है कि देश विरोधी गतिविधियों पर सख्त एक्शन होगा ही।

दरअसल, महबूबा मुफ्ती अपनी पार्टी में ही भारी विरोध का सामना कर रहीं हैं। पार्टी के कई नेता महबूबा मुफ्ती की खुलकर बगावत कर रहे हैं। अबतक वो मुख्यमंत्री थीं इसलिए सब चुप थे लेकिन सीएम पद से हटते ही नेताओं ने पार्टी को निजी हित में इस्तेमाल करने और परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं। पार्टी में गोर विरोध और असंतोष को देखते हुए महबूबा ने केंद्र सरकार पर पार्टी तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया है और आतंकियों को पैदा करने की धमकी दी है। यानी महबूबा का चरित्र खुलकर सामने आ गया है और संभवत: महबूबा के इसी नीति का विरोध उनकी पार्टी के नेता कर रहे हैं।

हालांकि, जम्मू-कश्मीर के बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र रैना ने महबूबा के बयान को आपत्तिजनक बताया है और कहा है कि बीजेपी पीडीपी को तोड़कर सरकार बनाने की कोशिश नहीं कर रही है।

हालांकि, बीजेपी के सहयोगी पूर्व अलगाववादी सज्जाद लोन की पार्टी पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पीडीपी में एक राजनीतिक नियंत्रण स्थापित कर इसके बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। पीडीपी के कम से कम पांच विधायकों ने सार्वजनिक तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के खिलाफ बयान दिया था। बागी नेता इमरान अंसारी ने दो दिन पहले ही अलग मोर्चा बनाने की बात कही थी। उन्होंने पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर दिल्ली को ब्लैकमेल करने का आरोप भी लगाया था।

इन नेताओं को पता है कि केवल महबूबा की स्वयं के राजनीतिक व व्यक्तिगत हित के चलते ही सरकार चली गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here