अयोध्या पर मोदी का मास्टरस्ट्रोक, SC से गैर-विवादित भूमि मांगी

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सुप्रीम कोर्ट में लगातार टल रही सुनवाई के बीच राम मंदिर मामले में मोदी सरकार ने अबतक की सबसे बड़ी संवैधानिक पहल है। सरकार के इस कदम से वे विपक्षी पार्टी जो कभी भी राम मंदिर मसले को लेकर अपना मुंह नहीं खोले और मोदी सरकार पर कुछ नहीं करने का आरोप लगाते रहे हैं, मोदी सरकार के इस पहल से चारो खाने चित्त हो गए हैं।    

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मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया।

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने राम मंदिर विवाद को लेकर अपने स्तर पर बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आग्रह किया है कि वह गैर विवादित जमीन केंद्र सरकार को सौंप दे। इसके साथ ही कोर्ट से निवेदन किया है कि जो विवादित स्थल पर जमीन हिन्दू पक्षकारों को दी गई है, उसे रामजन्मभूमि न्यास को सौंप दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में आज मंगलवार को ही सुनवाई होनी थी लेकिन बेंच में शामिल एक जज की अनुपस्थिति के चलते सोमवार को ही टाल दिया गया था। इस महत्वपूर्ण मसले पर सुप्रीम की लगातार अनदेखी जैसे व्यवहार से पूरे देश में सवाल खड़े हो रहे हैं। कई मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई दो घंटे में शुरू होने, कई मामलों में रात में कोर्ट खोलकर सुनवाई करने के उदाहरण देकर राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण मसले की लगातार अनदेखी पर सवाल उठना लाजिमी है। लोगों के सामने यह तथ्य भी विचारणीय है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसा जानबूझकर कर रहा है? जबकि, इसr मामले में एक पक्षकार की तरफ से पेश कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल सुनवाई को लोकसभा चुनाव 2019 तक टालने का निवेदन कर चुके हैं। ऐसे में, सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट कपिल सिब्बल की मांग के अनुसार काम कर रही है?

बहरहाल, मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अयोध्या में हिंदू पक्षकारों को जो हिस्सा दिया गया है, वह रामजन्मभूमि न्यास को दे दिया जाए। जबकि 2.77 एकड़ भूमि का कुछ हिस्सा भारत सरकार को लौटा दिया जाए।

गौरतलब है कि अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के आसपास की करीब 70 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के पास है। इसमें से 2.77 एकड़ की जमीन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था। जिस भूमि पर विवाद है वह जमीन 0.313 एकड़ ही है। सरकार का कहना है कि इस जमीन को छोड़कर बाकी जमीन भारत सरकार को सौंप दी जाए। मोदी सरकार का कहना है कि जिस जमीन पर विवाद नहीं है उसे वापस सौंपा जाए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामले की सुनवाई के लिए पांच जजों की पीठ का गठन किया है, जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस एस. ए. बोबडे और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं।

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