नए साल में ‘मालामाल’ होने की खबर,…हाथ-मुंह धोकर पढ़िए

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चुनावी साल में सब होंगे मालामाल

सामान्य वर्ग आरक्षण के बाद मोदी सरकार केद्रीय खजाने का मुंह किसानों, गरीबों, बेरोजगारों के लिए खोलने जा रही।

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रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

नई दिल्ली। बीते साल मोदी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच गहमागहमी की जो खबरें आ रही थी उसके मूल में था कि देश का शीर्ष बैंक आरक्षित धन में से कुछ केंद्र सरकार को दे। नए साल में चुनाव सिर पर है और मोदी सरकार लोगों को एक के बाद एक राहत का फल देने की कोशिश कर रही है।

जो खबरें आ रही है उसके मुताबिक मकर सक्रांति के बाद मोदी सरकार देश के किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों और गरीबों के लिए खजाने का द्वार खोलने जा रही है। 16 जनवरी को कैबिनेट बैठक में सरकार सभी तरह के किसानों, बेरोजगारों और गरीब लोगों को उनके अकाउंट में एक मुश्त 30 हजार रुपये की मदद देने जा रही है।

सूत्रों बताते हैं कि इस मदद को ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम’ (यूबीआई) के तहत दिया जाएगा।  हालांकि, स्कीम लागू होने के बाद राशन और एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ लोगों को नहीं मिलेगा।

नए प्रस्ताव के मुताबिक किसानों को खेती के लिए अब सरकार सीधे खाते में पैसे देगी। खास बात यह है कि जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, सरकार उन्हें भी इस स्कीम में शामिल कर फायदा पहुंचाएगी।

मोदी सरकार के प्लान के मुताबिक गरीब किसानों व बेरोजगारों को प्रत्येक महीना 2500 हजार रुपया दिया जाएगा। यह राशि हर महीने के बजाए एकमुश्त दी जाएगी।

किसानों के परिवारों को भी मदद पहुंचाई जा सकती है। राहत पैकेज में बीमा, कृषि लोन, आर्थिक मदद दी जा सकती है। स्कीम में छोटे, सीमांत और बटाईदारों या किराया पर किसानी करने वाले किसानों को फायदा देने पर जोर दिया गया है।

किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने जिन दो मॉडल का अध्ययन किया है, उसमें ओडिशा का मॉडल ज्यादा दमदार है। ओडिशा के कालिया मॉडल में किसानों को 5 क्रॉप सीजन में 25000 रुपये दिए जाते हैं। हालांकि, मोदी सरकार किसान को सालाना एक मुश्त आर्थिक मदद देने पर विचार कर रही है।

 

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