‘मजबूत’ मोदी सरकार : पहली बार रोहिंग्याओं को भेजा गया म्यांमार

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Assam Police hands over Rohingyas

देश के खिलाफ काम करने वाले कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में निरर्थक प्रयास के बावजूद पहली बार रोहिंग्याओं को देश से निकाला गया। ऐसा मोदी सरकार में ही संभव है। बाकि पार्टियों की हालत यह है कि वे सत्ता और पैसा के लिए बाहरी मुसलमानों के मुद्दे पर भी देश में वोट की राजनीति करने से भी बाज़ नहीं आते।     

2012 में अवैध रूप से भारत में घुस आए सात रोहिंग्याओं को बृहस्पतिवार को म्यांमार पुलिस को सौंपा गया।Assam Police hands over Rohingyas

रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो/(एजेंसी इनपुट सहित)।

नई दिल्ली/इंफाल। अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा देश में लंबे समय से रहा है लेकिन पिछली कोई भी सरकार ने इसपर कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक करोड़ों बांग्लादेशी भी अवैध रूप से पिछले पांच दशकों से रह रहे हैं लेकिन कांग्रेस सरकार ने कभी इसे मुद्दा ही नहीं माना। वामपंथियों का हाल तो यह रहा कि इनकी दृष्टि और विचार में जैसे मुसलमान होना ही सहिष्णुता और धर्म निरपेक्षता का पैमाना है।

 

modi-pm-red-fortबहरहाल, लंबे समय बाद देश में पूर्ण बहुमत से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी केंद्रीय सरकार ने सभी जटिल मुद्दों पर एक स्पष्ट नजरिया के तहत कार्यवाही करने का फैसला किया है। इसी के तहत वर्ष 2012 में पकड़े गए अवैध रोहिंग्याओं को उनके देश भेजने की मोदी सरकार ने कोशिश की। कई चरणों में म्यांमार की सरकार से इनके अपने नागरिक होने की पुष्टि के बाद बृहस्पतिवार को सरकार ने सात रोहिंग्याओं को इम्फाल से मणिपुर की मोरेह सीमा पर ले जाया गया, जहां उन्हें म्यांमार के इमिग्रेशन अधिकारियों को सौंप दिया गया। ऐसा पहली बार हुआ है कि भारत में रह रहे अवैध रोहिंग्याओं की पुष्टि और वेरिफिकेशन के बाद उन्हें उनके देश भेज दिया गया। सरकार का मानना है कि यह शुरुआत है। अवैध तरीके से देश में रह रहे सभी रोहिंग्याओं को उनके देश भेजे जाने की कार्यवाही की जाएगी।

इसी बीच, रोहिंग्याओं को उनके देश भेजे जाने के खिलाफ प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशांत भूषण देश में अवैध रूप से रह रहे म्यांमार के रोहिंग्या नागरिक को भारत में ही क्यों रखना चाहते हैं जबकि इन रोहिंग्याओं पर देश के विरोध काम करने के कई मामले भी सामने आए हैं।

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