दिल्ली दरबार की ‘पकड़’ से गुरुग्राम में मोहित ग्रोवर का ‘पॉलिटिकल डेब्यू’ 

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कांग्रेस की राजनीति में ‘दिल्ली दरबार’ पर ‘पकड़’ वह पावर है जो नेताओं की राजनीतिक कैरियर को सफलतापूर्वक लॉन्च करता है। हरियाणा की राजनीतिक ‘पकड़’ के कई सूत्रों में से मोहित मदन ग्रोवर ने ‘सहारे ‘का जो ‘सिरा’ पकड़ा है वह फिलहाल महत्वपूर्ण दिखता है। 

गुरुग्राम में एक जनसभा को संबोधित करते मोहित मदन ग्रोवर।mohit-madan-grover

डॉ. मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया ब्यूरो।

गुरुग्राम। पांच बार से गुरुग्राम विधानसभा से कांग्रेस के विधायक रहे उम्रदराज नेता धर्मवीर गाबा के ‘राजनीतिक अवसान’ के बाद यह सीट कांग्रेस के कई नेताओं और गुटों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसीलिए कांग्रेस के नए-पुराने कई नेता /यहां अपने को प्रस्तुत करने को प्रचार सहित अन्य कई माध्यमों से मैदान में आने को आतूर हैं। इस कड़ी में गुरुग्राम कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष मदन लाल ग्रोवर के पुत्र मोहित मदन ग्रोवर राजनीति में औपचारिक पदार्पण (डेब्यू) करने के साथ ही इस सीट पर अपना दावा प्रस्तुत करने को दमखम लगाए हुए हैं।

एक समय था, कांग्रेस के ये क्षत्रप राज्यों की राजनीति में जितना मजबूत होते थे, उस आधार पर दिल्ली दरबार में उनकी हिस्सेदारी तय की जाती थी। परंतु, यह ट्रेंड बदला है। अब जो क्षत्रप दिल्ली दरबार में जितना मजबूत होते हैं, उसी आधार पर राज्यों में उनकी हिस्सेदारी तय की जाती है।

2014 में पहले लोकसभा और बाद में विधानसभा चुनाव में हार के बाद हरियाणा में कांग्रेस की गुटबंदी बेर्पदा हो गई। वैसे, कांग्रेस में ‘खेमेबाज़ी’ का रोग पुराना है। राज्यों में कांग्रेस की राजनीति ‘क्षत्रपों’ के अनुसार बंटी हुई होती है और यही ‘क्षत्रप’ दिल्ली दरबार की राजनीति में भागीदार होते हैं। एक समय था, कांग्रेस के ये क्षत्रप राज्यों की राजनीति में जितना मजबूत होते थे, उस आधार पर दिल्ली दरबार में उनकी हिस्सेदारी तय होती थी। परंतु, यह ट्रेंड बदल गया है। अब जो क्षत्रप दिल्ली दरबार में जितना मजबूत होते हैं, उसी आधार पर राज्यों में उनकी हिस्सेदारी तय होती है।

हरियाणा की राजनीतिक संदर्भ को देखें तो जब यहां कांग्रेस की सरकार थी, पार्टी में कई गुट हावी थे। सत्ता जाने के बाद कुछ गुट शांत हो गए। सार्वजनिक रूप से अब दो गुट ‘हुड्डा’ और तंवर में कांग्रेस बंटी दिखती है। कुछ स्थानीय ताकत रखने वाले नेता जरुरत के मुताबिक गुट बदलते रहते हैं। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद दिल्ली दरबार में रणदीप सिंह सूरजेवाला बेहद प्रभावशाली हैं और मोहित मदन ग्रोवर राजनीति में अपनी ‘डेव्यू’ इन प्रचलित गुटो से अलग सूरजेवाला के समर्थन में करने जा रहे हैं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में यह रणनीति ज्यादा सही व प्रभावी दिखता है।

नया साल अपने साथ चुनावी खुशबू भी लेकर आया है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। अपनी दावेदारी को लेकर पार्टियों में कई नेता ताल ठोंक रहे हैं। चुनावी माहौल से अलग सामान्यत: हरियाणा की परंपरागत राजनीति में और जनता की नज़र में सत्ता पक्ष के सामने विपक्ष हमेशा हथियार डाले ही दिखाई देता है। परंतु, युवा आक्रोश को आधार बनाकर आयोजित की जा रही रैली में जनता के सामने रणदीप सिंह सूरजेवाला निश्चित ही केंद्र व हरियाणा सरकार पर हमला बोलेंगे। साथ ही, युवा नेता के रूप में मोहित मदन ग्रोवर की सक्षमता व क्षमता का बखान भी करेंगे। और …औपचारिक रूप से मोहित कांग्रेस पार्टी के चुनावी कार्यकर्ता के रूप में जनता के बीच पहुंचेंगे।

जिस तरह अभिनेताओं के बच्चे फिल्मों में डेब्यू करते हैं तो उसका प्रचार बेहद जोर-शोर से होता है ताकि वे दर्शकों के बीच अपना औपचारिक पहचान बना सकें। उस अंदाज़ में देखना होगा कि मोहित मदन ग्रोवर का राजनीति में औपचारिक डेब्यू के मौके पर सूरजेवाला का सरकार पर हमला जनता के बीच उनकी पहचान बनाने में कहां तक मददगार साबित होता है।

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