मोदी के लिए फिलवक्त पाकिस्तान की ओर देखना भी ठीक नहीं

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पाकिस्तान सेना के समर्थन से चुनाव में सबसे ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाने वाली पार्टी तहरी-ए-इंसाफ के सुप्रीमो इमरान खान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण में पीएम मोदी के जाने को लेकर कई सवाल

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मनोज कुमार तिवारी/रिपोर्ट4इंडिया।

नई दिल्ली। पाकिस्तान की सेना समर्थित उम्मीदवार व पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के सुप्रीमो इमरान खान वहां अभी संपन्न हुए आम चुनाव में सबसे बड़े नेता बनकर उभर हैं। वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें फोन कर बधाई दिए जाने के बाद अटकलें थी कि इमरान खान भी अपने शपथ ग्रहण समारोह में भारत सहित दक्षेस (सार्क) देशों के शासनाध्यक्ष को बुला सकते हैं, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह 2014 में बुलाया था। खबर है कि तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने पाकिस्तान विदेश कार्यालय से पूछा है कि क्या शपथ-ग्रहण समारोह में पीएम मोदी सहित अन्य विदेशी गण्यमान्यों को आमंत्रित किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर सबसे बड़ी बाधा पाकिस्तान की सेना है। पाकिस्तान की सेना दुनिया की एकमात्र ऐसी सेना है जिसके नेतृत्व में आंतकवादी और आतंकी संगठन पलते हैं। दुनिया का सबसे खुंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान सेना की सुरक्षा में ही एबटाबाद में चार साल तक छिपकर रह रहा था। दुनिया जानती है कि कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पाकिस्तान के सेना के नियंत्रण में चल रहा है।

वर्तमान में पाकिस्तान आर्थिक रूप से अपने सबसे संकटकालीन दौर से गुजर रहा है। विश्व बैंक से लेकर अन्य विदेशी बैंकों सहित अमेरिकी संस्थाओं ने पाकिस्तान को सभी प्रकार के कर्ज देना बंद कर दिया है। भारत ने पाकिस्तान को आतंकवादी देश के रूप में स्थापित करने के दुनियाभर में प्रयास किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगे हैं और उसे सबसे जोखिम वाले देश के रूप में चिन्हित किया गया है। ऐसे में पाकिस्तान और उसकी सेना को पता है कि कम से कम भारत से संबंध सुधारने का दिखावा कर ही वह कुछ राहत प्राप्त कर सकता है।

भारत में अगले साल 2019 में आम चुनाव होने हैं। अशांत और नष्ट होने के कगार पर पहुंचे पाकिस्तान को कांग्रेस पार्टी जीवन देने को बेचैन हो सकती है। क्योंकि कांग्रेस ने आज 70 सालों तक यहीं किया है। परंतु मोदी सरकार के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का ऐसा करना जोखिम भरा काम है। भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह मुंबई हमले के मास्टरमाइंड आंतकी हाफिज सईद और पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड और आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का सरगना सैय्यद सलाहुद्दीन पर कार्रवाई करे लेकिन वह अबतक ऐस करने से बचता रहा है।

ऐसी स्थिति में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान जाने के बारे में सोचना भी राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला होगा। बीजेपी को समझना होगा कि वह कितना भी उदार नीति अपनाए, यहां का मुसलमान उसे वोट देने वाला नहीं है। भारत के हिन्दुओं को यकीन है कि उनके हित में अगर कोई पार्टी कुछ करेगी तो वह भाजपा ही है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रति थोड़ा भी झुकाव राजनीतिक तौर पर बीजेपी को नुकसानदेह साबित होगा। यह प्रधानमंत्री की छवि    के अनुकूल भी नहीं होगा। एकबार वे अचानक पाकिस्तान जाकर उसका अंजाम देख चुके हैं।

हालांकि, अभी तक औपचारिक रूप से पाकिस्तान की तरफ से मोदी सरकार को शपथ ग्रहण का बुलाया नहीं आया है। तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) बिना पाकिस्तानी सेना (विदेश विभाग) से इजाजत लिए मोदी सरकार को आमंत्रित नहीं कर सकती है। खबर है कि पीछे से पाकिस्तानी सेना चीफ से पूछा गया है। कई समस्याओं से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह बेहद लाभदायक स्थिति होगा कि वह भारतीय प्रधानमंत्री को आमंत्रित करे।

परंतु, प्रधानमंत्री मोदी के लिए न तो यह माकूल समय है और न ही राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी है कि वह बुलाने पर पाकिस्तान जाएं। पाकिस्तान में चुनाव में सेना के ईशारे पर व्यापक धांधली का वहां कि प्रमुख राजनीतिक पार्टियां पाकिस्तान मुसलिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) विरोध कर रहीं हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तानी सेना ही ईमरान खान को प्रधानमंत्री बनाना चाह रही है। यानी, इमरान खान पाक सेना का कठपुतली है। यदि पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टियां इस तरह से मान कर वहां इमरान के प्रधानमंत्री बनाए जाने का विरोध कर रही है।

संभव है कि आमंत्रण के बाद प्रधानमंत्री मोदी का पाकिस्तान नहीं जाने को वहां मुद्दा बनाया जाए। लेकिन फिलहाल मोदी को भारतीय परिप्रेक्ष्य में सोचना है। पाकिस्तान के बड़े राजनीतिक दल शपथ ग्रहण समारोह का विरोध कर रहे हैं, ऐसे में भारत के पास मौका है कि वह आभार जताकर औपचारिक निमंत्रण को डस्टबीन में डाल दे।

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