R. BHARAT के खुलासे से AIIMS फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. सुधीर गुप्ता ‘नंगे’ हो गए

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सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में एम्स मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता पर आत्महत्या की थ्यूरी गढ़ने का पुख्ता शक। डॉ. सुधीर गुप्ता पर बड़ा सवाल, लुटियंस मीडिया और लुटियंस गांधी के ईशारे पर सुधीर गुप्ता की बोली बदली।

मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया।

नई दिल्ली। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के संदेहास्पद मौत के मामले में एम्स के फॉरेंसिक विभाग के हेड और सीबीआई जांच के तहत गठित एम्स मेडिकल बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सुधीर गुप्ता के मीडिया संस्था आर. भारत को दी गई जानकारी से बड़ा खुलासा सामने आया है। दशकों तक कांग्रेस सरकारों के रहमो-करम पर मीडिया का बड़ा बाजार खड़ा करने वाला इंडिया टूडे ग्रुप का न्यूज़ चैनल ‘आजतक’ और वामपंथी मीडिया मसीहा एनडीटीवी ने डॉ. सुधीर गुप्ता के एक व्हाट्सएप्प चैट के आधार पर सुशांत सिंह राजपूत की मौत को सीधे-सीधे आत्महत्या करार दिया। और इसी, आधार पर सीबीआई जांच के बाद लंबे समय से इस मामले में चुप्पी साधने वाले मुबंई पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि मुंबई पुलिस की जांच सही थी।

आर. भारत से बातचीत में क्या कहा था डॉ. सुधीर गुप्ता ने 

– 22 अगस्त 2020 को आर भारत के रिपोर्टर प्रशांत कुमार से बातचीत में कहा था कि सुशांत सिंह की मौत और क्राइम सीन को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। यह मुंबई पुलिस की बड़ी खामी है। मैंने सुनंदा पुष्कर मामले में क्राइम सीन को चार साल तक सुरक्षित रखा था। सुशांत सिंह राजपूत मामले में क्राइम सीन को पूरी तरह से खुला छोड़ देने और सैकड़ों लोगों की मौके पर आवाजाही से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना असंभव है।

-मुंबई नगर निगम के अंतर्गत संचालित कूपर अस्पताल में सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमार्टम किया गया जिसमें कई खामियां हैं। डेथ का समय का जिक्र नहीं है, ऑप्टोप्सी रिपोर्ट अधुरा है, शरीर और गले पर पर चोट या अन्य बने निशान के संदर्भ में कोई जिक्र नहीं है। कूपर अस्पताल के पांच सदस्यीय पोस्टमॉर्टम टीम में मात्र एक जुनियर फॉरेंसिक डॉक्टर था गलत था। यहां पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट टीम का होना आवस्यक था जो हर पहलु पर फाइंडिंग रिपोर्ट में रखता।

-डॉ. सुधीर गु्प्ता ने पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी नहीं किए जाने या उस बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही थी। उन्होंने पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया और इसे किसी नतीजे पर पहुंचाने में नाकाफी प्रमाण बताया था।

यानी, सुशांत सिंह राजपूत के मौत मामले में मुंबई पुलिस और कूपर अस्पताल दोनों ने तय कानून और संस्थागत प्रोफेशन मर्यादा को घोर उल्लंघन किया।

आर. भारत के इस खुलासे से पूरा देश हतप्रभ है कि कैसे विश्वस्तरीय संस्थान दिल्ली एम्स का एक जिम्मेदार पद पर बैठा महत्वपूर्ण व्यक्ति डॉ. सुधीर गुप्ता सुशांत केस में अगल-अलग मीडिया से फॉरेंसिक प्रमाण पर अलग-अलग बयान देता है।सवाल यह भी है कि जब क्राइम सीन औऱ ऑटोप्सी रिपोर्ट ही सही नहीं थे तो वे इस तथ्य पर कैसे पहुंचे की सुशांत सिंह ने सौ फीसद आत्महत्या की थी। जबकि, उन्होंने अबतक रिपोर्ट सीबीआई को ही नहीं सौंपी है।

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