हालत-ए-कांग्रेस : दुखवा कासे कहूं… ‘मोरी सजनी’

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कांग्रेस में गुटबाजी का प्रभाव।

Haryana-Maharashtra Election 2019 के बीच हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर का कांग्रेस से इस्‍तीफा, महाराष्ट्र के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय निरूपम का पार्टी पर हमला। 

हरियाणा में चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने और टिकट बंटवारे में अनदेखी से तंवर थे नाराज़। हरियाणा व महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव प्रचार मात्र 14 दिन शेष जबकि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल विदेश यात्रा पर लाओस निकल गए।

Manoj Kumar Tiwary / Report4India/  New Delhi.

55 से अधिक वर्षों तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी का वर्तमान में दिवाला निकलता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस की यह हालत कोई और नहीं बल्कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के व्यवहार व बयानों से झलकता है। 2019 में लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से पिटी कांग्रेस में हरियाणा व महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान गुटबाजी व बिखराव चारों तरफ दिखा। हालत यहां तक बिगड़े की जहां हरियाणा  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया वहीं, महाराष्ट्र में मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम ने अपनी नारागजी जाहिर करते हुए पार्टी का चुनाव प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। इन सबके बीच, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बीच चुनाव विदेश दौरे पर निकल गए हैं। कांग्रेस का हाल ऐसा हो गया जैसे सब हताश-परेशान हो गए हैं। आखिरकार, अपनी पीड़ा किससे कहें, किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

तंवर-उवाच : “कांग्रेस के बड़े नेता चुनाव के दौरान राक्षसों की तरह प्रकट हो जाते हैं।”

हरियाणा में सीट बंटवारे में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दिल्ली पार्टी मुख्यालय के बाहर अपने समर्थकों के साथ विरोध जताने के बाद आखिरकार अशोक तंवर ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीपा दे दिया। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर एसी में जीवन गुजारने और चुनाव के मौके पर राक्षकों की तरह बाहर निकलकर पार्टी पर चा जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, पार्टी की कार्यवाहक राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्‍यता से इस्‍तीफा भेजा है। तंवर ने कहा, बड़े दुख के साथ पार्टी छोड़नी पड़ रही है।  तंवर के इस्‍तीफे के बाद हरियाणा में विभिन्न जिलों में उनके पार्टी समर्थकों, कार्यकर्ताओं ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर पार्टी को हाईजैक करने का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।

तंवर ने इस्तीफे में लिखा है कि कांग्रेस में मौजूदा संकट राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की वजह से नहीं बल्कि गंभीर आंतरिक विरोधाभास से है। परिश्रमी कांग्रेस कार्यकर्ता जो किसी बड़े राजनीतिक घराने से नहीं आते और जिनके पास पैसा नहीं है, उनका पार्टी में कोई महत्व नहीं है। इससे पहले, उन्होंने सोहना में पांच करोड़ रुपए लेकर टिकट देने का आरोप लगाया था।

तंवर ने पार्टी के शीर्ष नेताओं की ओर ईशारा करते हुए कहा कि ब्लैकमेलिंग और गलत तरीके से अर्जित किए पैसे के बल पर ये कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र को ध्वस्त कर चुके हैं। ये पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वालों को आगे नहीं आने देना चाहते। मैं अकेले ऐसा नहीं हूं जो इनका शिकार हुआ हूं। ऐसे हजारों कार्यकर्ता हैं जो इनकी वजह से पार्टी में अपनी जगह नहीं बना पाते। इन परिस्थितियों में मेरे लिए अपना और पिछड़े, दलित वर्ग के कार्यकर्ताओं का मान-सम्मान बनाए रखना आसान नहीं होगा।

दूसरी तरफ राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी देखें तो गुटबाजी व विरोध चरम पर है। राजस्थान में जहां सीएम अशोक गहलौत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच खींचतान है तो मध्य प्रदेश में सीएम कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच टशन है। इन दोनों राज्यों में राहुल गांधी के समर्थकों को किनारे लगा दिया गया। कांग्रेस पार्टी के शीर्ष तौर सोनिया और प्रियंका गांधी की एक बड़ी लॉबी काम करती है तो दूसरी तरफ राहुल गांधी के लोग अलग से पहचाने जाते हैं। यानी, कांग्रेस शीर्ष घराने में ही दो केंद्रों के बीच पार्टी झूल रहीं है।

 

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