IIMS का रिपोर्ट: मां गंगा का जल आज भी मनुष्यों को कई बिमारियों से है बचाता

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गंगा मइया।

वैज्ञानिक शोध रिपोर्ट यह बताता है, गंगाजल कई एंटीबॉयोटिक दवाओं से ज्यादा असरदार

रिपोर्ट4इंडिया/ नई दिल्ली।  

सनातन से मां गंगा धर्म व संस्कृति की वाहक रहीं हैं। उनकी गोद में न जाने कितनी संस्कृतियां पली-बढ़ीं और भारतवर्ष की प्रचीनता को प्रवाहमान बनाये रहीं। देश की बड़ी आबादी मां गंगा और उनकी सहायक नदियों के किनारे पलता और पोषित होता है। धर्म व संस्कृति मां गंगा से ही प्राण पाती रहीं। भारतीय जीवन संस्कृति के सातो रिश्तों के केंद्र में मां गंगा विराजमान हैं। गंगाजल की पवित्रता का कोई सानी नहीं, वे देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। अब गंगाजल की महिमा को एकबार फिर स्थापित किया गया है। एम्स की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गंगाजल कई तरह के संक्रमण के इलाज में रामबाण साबित हो सकता है। यही नहीं, गंगाजल कई एंटीबायोटिक दवाओं से भी ज्यादा कारगर है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के एक रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में एक अध्ययन से पता चला है कि गंगा में पनपने वाले एक खास प्रकार के बैक्टीरिया गंभीर मानव रोगों के इलाज में कुछ मौजूदा दवाओं की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, गंगाजल में कुछ खास तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो इंसानों में गंभीर संक्रमण के इलाज में शामिल कुछ एंटीबायोटिक से भी ज्यादा कारगर है।

फिलहाल उपयोग किए जा रहे एंटीबायोटिक दवाओं की अपेक्षा गंगाजल एक बड़ा विकल्प होगा, जो रक्त प्रवाह संक्रमण, गंभीर जलन, सर्जिकल साइट्स, निमोनिया, मधुमेह संक्रमण सहित फेफड़ों के संक्रमण के इलाज में अपनी प्रभावकारिता खो चुके थे।

शोधकर्ताओं के अनुसार, पानी में सूक्ष्मजीवों में से एक डीएनए (ड्रग-रेजिस्टेंट इन्फेक्शन) शामिल है, जिसका उपयोग मानव रोगों के इलाज के लिए किया जा सकता है जो दवा प्रतिरोधी हैं। विभाग ने सूक्ष्म जीव को स्यूडोमोनास एरुगिनोसा नाम दिया है। स्यूडोमोनास एरुजिनोसा, विशेष रूप से, एक बैक्टीरिया है जो प्रतिरक्षा में अक्षम व्यक्तियों को प्रभावित करता है।

विभागीय प्रमुख डॉ. रमा चौधरी ने इस संबंध में कहा है, संक्रमण के इलाज में सेफ्टाज़िडाइम, इमिपेनेम और एमिकैसीन सहित एंटीबायोटिक्स अप्रभावी साबित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, बैक्टीरिया दवा प्रतिरोध विकसित कर रहे थे, कुछ एंटीबायोटिक विकल्पों और उच्च उपचार लागतों की पहेली बना रहे थे। डॉ. रामा ने कहा, “कुछ प्रकार के जीवाणु संक्रमण अक्सर गंभीर होते हैं और यहां तक कि उच्च मृत्यु दर और रुग्णता भी होती है। ऐसे मामले होते हैं जहां लोगों को मधुमेह के कारण गंभीर त्वचा के घाव हो जाते हैं और शरीर के अंगों को काटना पड़ता है।