मन की बात : ‘स्वदेशी सामान ही नहीं ‘देशी डॉग’ के प्रति भी सम्मान दिखाएं’ 

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पीएम मोदी की मन की बात।

स्वाभिमानी व आत्मनिर्भर भारत बनाने को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री का इशारा है कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब केवल स्वदेशी निर्माण पर बल देना ही नहीं बल्कि देशी जीव-जंतुओं, पेड-पौधों, व प्रकृति के प्रति भी आदर व सम्मान का भाव प्रकट करना, उसे अपनाना है।  

report4india bureau/ New Delhi by Manoj kumar Tiwary.

नई दिल्ली। भारत को दुनिया में अलग व सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी निरंतर कार्यरत है। इसीलिए वे देश व दुनिया के हर मंच व मौकों पर अपना ध्येय बताने से नहीं चुकते हैं। उन्होंने एक बार फिर अपने मासिक उद्बोधन कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से अपना विचार देश के सामने रखा है। अगस्त के अंतिम रविवार को उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान को स्पष्ट किया और कहा कि इसके लिए आत्मविश्वास के साथ नवीनता, कल्पनाशीलता को गति देत हुए काम करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने इस संबंध में देश को खिलौना उत्पादन के लिए प्रेरित किया और कहा कि इस क्षेत्र में फिलहाल भारत का स्थान बहुत पीछे है। उन्होंने कहा, खिलौना बाजार दुनिया में सात लाख करोड़ रुपए है और हम इसमें बड़ा कदम आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत स्वदेशी सोच का आगे बढ़ाकर नई कल्पना और थीम के आधार पर काफी काम कर सकता है। हालांकि, बिना नाम लिए प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती भूमिका को चुनौति दी है।अभी हाल ही में भारत ने चीन के खराब व नीचले दर्जे के खोलौने की आयात पर रोक लगा दिया है।

इस बेहद चर्चित व महत्वपूर्ण संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बातों का जिक्र किया। उन्होंने कृषि उत्सव, पोषण, देसी डॉग आदि को लेकर अपने विचार रखे। यह अब साफ हो गया है कि भारत किसी भी देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता है और प्रत्येक क्षेत्र में घरेलु उत्पादन को बढ़ाने की ओर तत्पर है।

पीएम ने उद्योग जगत और स्टार्ट-अप से अपील की कि ‘देश बहुत-सी नई आइडिया और कंसेप्ट से भरा पड़ा है और बाहरी चरित्र व भावनाओं पर आधारित खिलौने से हमारे बच्चों को बचाने की जरुरत है। भारत में खिलौने बनाएं, ऐसे ‘खेल’ की शुरुआत करें जो भारत की संस्कृति व इतिहास का दर्शन कराए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे खिलौने बनने चाहिए जो बच्चों में कल्पनाशीलता, रचनात्मकता को बढ़ाए। उन्होंने नई शिक्षा नीति में खिलौने का वर्णन कर कहा कि खेल खेल में सीखना, जहां खिलौने बनते हैं वहां बच्चों का विजिट करना यह सब पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इससे बच्चों की क्षमता और रचनात्मकता बढ़ेगी। इस संदर्भ में उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का भी हवाला दिया।

चीनी एप्प को प्रतिबंधित किए जाने के बाद पीएम ने सरकार के स्तर पर चलाए गए ‘एप्प चैलेंज’ का भी जिक्र किया और कहा कि ये नवीन सोच के परिचायक हैं। मसलन कुटुकी जिसमें छोटे बच्चे खेल खेल में गानों और कहानियों के जरिए ही गणित और साइंस सीख जाते हैं। उन्होंने चिंगारी, जोहो वर्कप्लेस, एपटीससी टैलेंट जैसे भारतीय एप्प का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से देसी कुत्तों को अपनाने का संदेश दिया। इस संदर्भ में उन्होंने आर्मी के सोफी और विदा, बलराम, भावना, राकी जैसे श्वान का जिक्र कर कहा कि देश की रक्षा में इनका अहम योगदान है और देश इसे भूल नहीं सकता। उन्होंने इंडियन ब्रीड के कुत्तों में हिमाचली हाउंड, मुधौल हाउंड, चिप्पीपराई आदि का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर डॉग पालने है तो इंडियन ब्रीड को तरजीह दें। प्रधानमंत्री ने कहा- ‘अब आत्मनिर्भर भारत में कोई भी क्षेत्र पीछे नहीं होगा।’

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