NHAI परियोजना निदेशक एसके मिश्रा की अगुवाई में गन्ना शीरे से सड़क निर्माण का सफल परीक्षण

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गन्ना शिरा (मोलायसिस) मिश्रित तारकोल बिटुमिन से निर्मित सड़क का रिसर्च टीम के साथ निरीक्षण करते एनएचएआई परियोजना निदेशक एसके मिश्रा।

“रिसर्च में गन्ने से चीनी निर्माण के दौरान तैयार वाय-प्रोडक्ट शीरा (मोलायसिस) का 25 फीसदी मात्रा तारकोल बिटुमिन में मिलाकर साढ़े छह सौ मीटर लम्बी सड़क का निर्माण किया गया। विश्लेषण व निगरानी में प्राप्त आंकड़े बेहद सफल रहे हैं”

एनएचएआई (बागपत) परियोजना निदेशक एसके मिश्रा।

report4india/new delhi/baghpat.

समय व समाज की जरुरत को लेकर एक विस्तृत फलक पर अनवरत सोच या मंथन नये अविष्कार को जन्म देता है। हरित क्रांति का पाथेय रहा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गन्ना व चीनी उत्पादन में देश में विशेष स्थान है। यहां लगातार इस विषय में अन्वेषण किया जाता रहा है कि गन्ना से उत्पादित चीनी व उसके वाई-प्रोडक्ट का नया उपयोग किस प्रकार किया जाय ताकि क्षेत्र व समाज की समृद्धि निरंतर जारी रहे। परिणामस्वरुप, शीरे (मोलायसिस) को सड़क तार (तारकोल) बिटुमिन में मिलाकर सड़क निर्माण का सफल परीक्षण किया गया।

मूलतः बिहार के सासाराम निवासी एनएचएआई बागपत के परियोजना निदेशक के पद पर कार्यरत एसके मिश्रा ने इस महती रिसर्च प्रोजेक्ट को लेकर बताया कि कई स्तरों पर शोध के बाद गन्ने से चीनी निर्माण के दौरान तैयार वाय-प्रोडक्ट शीरे (मोलायसिस) का 25 फीसदी मात्रा को 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तारकोल बिटुमिन में मिलाकर साढ़े छह सौ मीटर लम्बी सड़क का निर्माण किया गया। निरन्तर विश्लेषण व निगरानी के बाद प्राप्त आंकड़े बेहद सफल रहे हैं। शीरे व तारकोल के मिश्रण से निर्मित बिटुमिन मजबूत पकड़ व स्थायी सड़क सन्तुलन को बनाये रखने में भी मददगार है। यह मिश्रण तारकोल बिटुमिन कंक्रीट की तरह सड़क पर एकत्रित हो जाने की समस्या से भी निजात दिलाता है। साथ ही, इससे सड़क निर्माण में करीब 12 फीसद की लागत में कमी भी आएगी। गन्रा शीरे से सड़क निर्माण का यह दुनिया में पहला प्रयोग है।

शीरे के उपयोग से सड़क निर्माण संबंधी शोध को लेकर एसके मिश्रा ने बताया कि प्राचीन काल में गुड़ के शीरे का प्रयोग कलाकृतियां व भवन निर्माण होता रहा है। इसी को आधार बनाकर इस संबंध में रिसर्च को आगे बढ़ाया गया।

लैब में शिरा मिश्रित तारकोल बिटुमिन मैटेरियल टेस्ट रिपोर्ट का परीक्षण करती रिसर्च टीम।

उन्होंने बताया, रिसर्च के प्राप्त विश्लेषण को भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी भेजा जा रहा है और हमारी कोशिश है कि इस फार्मूले (शोध परिणाम) का पेटेंट भी कराया जाय। साथ ही, उन्होंने इस रिसर्च टीम में शामिल आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर निखिल साबू, जीआर इंफ़्रा प्रोजेक्ट रिसर्च हेड अतासी दास, क्वालिटी कंट्रोल हेड रणजीत कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर गिरिजेश त्रिपाठी को बधाई दी।