भारतीय समाज में ‘रूल ऑफ लॉ’ भारतीय संस्कार के मूल में : पीएम मोदी

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सुप्रीम कोर्ट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमीनार को संबोधित करते पीएम मोदी।

सुप्रीम कोर्ट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में देश-दुनिया भर से आए जज, एडवोकेट व ज्यूडिशियल प्रणाली से जुड़े दिग्गजों के बीच पीएम मोदी ने न्याय की सर्वोच्चता को भारतीय संस्कृति व सत्य-दर्शन की शानदार अभिव्यक्ति बताया।

मनोज कुमार तिवारी/ रिपोर्ट4इंडिया/ New Delhi.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्याय व सत्य के प्रति समर्पण को भारतीय संस्कारों व दर्शन की देन बताया। उन्होंने कहा, हमारा संस्कार ‘रूल ऑफ लॉ’ को जीवन के केंद्र में मानता है। भारतीय जीवन में सत्य व न्याय के प्रति समर्पण का भाव पारंपरिक-सांस्कृतिक जीवनधारा से निकला है। पीएम मोदी शनिवार को  सुप्रीम कोर्ट में आयोजित ‘ज्युडिशियल एंड द चेंजिंग वर्ल्ड’ विषय पर आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर अपने उद्गार प्रकट किए। समीनार में चीफ जस्टिस अरविंद बोबड़े, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद सहित सैकड़ों की संख्या में देश व दुनिया से आए जज, वकील आदि शामिल थे।

इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं। पीएम मोदी ने कहा, हमारे बापू (महात्मा गांधी) खुद भी बैरिस्टर थे। अपने जीवन का जो पहला मुकदमा उन्होंने लड़ा, उसके बारे में गांधीजी ने विस्तार से अपनी आत्मकथा में लिखा है। उन्होंने कहा, उन्हें पहला केस मुंबई में इस आधार पर मिला कि उन्हें किसी को कमिशन देना होगा, जिसे उन्होंने तुरंत रिजेक्ट कर दिया। सत्य-निष्ठा के प्रति गांधीजी में जो दृढ़ता पनपी व भारतीय संस्कृति व संस्कार जो सत्य को लौकिक व ईश्वर मानता है, की देन थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21वीं सदी के तीसरे दशक के शुरुआत में हो रहा यह सेमीनार भारत सहित पूरी दुनिया में होने वाले बड़े बदलावों का प्रतीक है। ये बदलाव सामाजिक, आर्थिक, और तकनीकी हर क्षेत्र में होंगे। ये बदलाव तर्क संगत और न्याय संगत होने चाहिए। ये बदलाव सभी के हित में होने चाहिए।

कार्यक्रम में चीफ जस्टिस एस.ए. बोबड़े ने कहा है कि दुनिया के किसी भी कोने मे कहीं भी बदलाव हो तकनीक की वजह से उसका असर दूसरे कोने तक जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां समय-समय पर दुनिया के कई हिस्सों से लोग आए उनके साथ-साथ संस्कृति, परम्पराएं और नियम कायदे आए।

चीफ जस्टिस ने कहा, हमारे संविधान निर्माताओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों के मुताबिक स्वतंत्रता और कर्तव्यों की अनिवार्यता के बीच तालमेल का पूरा ध्यान रखा। गांधीजी ने भी कर्तव्य को धुरी में रखा। सभी लोग अपने कर्तव्य को निष्ठा और ईमानदारी से पालन करेंगे तो देश सुचारू रूप से चलेगा।

 

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